(विश्व शांति और समझ दिवस 23 फरवरी 26 पर विशेष) दुनिया में शांति बनाए रखने के लिए जरूरी समझ और सद्भावना पर जोर देने के हर साल 23 फरवरी को विश्व शांति और समझ दिवस (World Peace and Understanding Day) मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने का उद्देश्य दुनिया में प्रेम-भाईचारा और शांति को बनाए रखना है। अविश्वास समाज को गलतफहमी, विद्रोह, लड़ाई और संघर्ष की ओर ले जाता है। समाज में एकजुटता की भावना को बनाए रखने के लिए शांति और समझ होना बेहद आवश्यक है। इसलिए हिंसा से रहित दुनिया में शांति लाने के उद्देश्य के लिए हर साल इस दिवस को मनाया जाता है। इस दिवस पर दुनिया भर के देशों में कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। : वर्ल्ड अंडरस्टैंडिंग एंड पीस डे हर साल 23 फरवरी को मनाया जाता है। यह रोटरी मेंबर्स द्वारा की गई पहली मीटिंग की एनिवर्सरी मनाने के लिए मनाया जाता है। हर साल 23 फरवरी को वर्ल्ड अंडरस्टैंडिंग एंड पीस डे मनाया जाता है। असल में, यह दिन रोटरी इंटरनेशनल के पहले कन्वेंशन को याद करने के लिए है। बिज़नेसमैन की यह मीटिंग ऐसी जगह पर होनी थी जहाँ उनके बैकग्राउंड से कोई फ़र्क न पड़े, जिससे कई डेवलपमेंट हुए और आखिरकार रोटरी इंटरनेशनल बना। रोटरी इंटरनेशनल की शुरुआत शिकागो, इलिनोइस में हुई थी, और यह एक ऐसा संगठन है जो इंसानियत की सेवा, दुनिया में शांति और अच्छी भावना के लिए काम करता है। पॉल हैरिस, गुस्तावस लोहर, सिल्वेस्टर शिएल और हीराम शोरी 23 फरवरी, 1905 को शिकागो शहर में यूनिटी बिल्डिंग के कमरा 711 में इकट्ठा हुए। यह रोटरी क्लब की पहली मीटिंग थी। उन्होंने मीटिंग की जगह बदलने के चलन के बाद नए क्लब का नाम “रोटरी” रखने का फैसला किया। वर्ल्ड अंडरस्टैंडिंग एंड पीस डे का इतिहास रोटरी इंटरनेशनल की स्थापना के लिए हुई पहली मीटिंग को वर्ल्ड अंडरस्टैंडिंग एंड पीस डे के तौर पर याद किया जाता है। पॉल पी. हैरिस, एक वकील, ने शिकागो में अपने बिज़नेस एसोसिएट्स की एक मीटिंग ऑर्गनाइज़ की थी। उन्होंने पॉलिटिकल और धार्मिक पाबंदियों से आज़ाद बिज़नेसमैन का एक ग्रुप इकट्ठा करने की कोशिश की। अपनी जगह की ज़रूरत होने से पहले, रोटरी शुरू में अपने मेंबर्स के ऑफिस में मिलती थी। बाद में चार और अमेरिकी शहरों में रोटरी क्लब शुरू किए गए, और जैसे-जैसे ऑर्गनाइज़ेशन का इंटरनेशनल लेवल पर विस्तार हुआ, इसका नाम रोटरी क्लब से बदलकर इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ़ रोटरी क्लब्स और फिर रोटरी इंटरनेशनल कर दिया गया। दुनिया भर की आठ यूनिवर्सिटीज़ में, रोटरी इंटरनेशनल ने शांति और संघर्ष में इंटरनेशनल स्टडीज़ के लिए रोटरी सेंटर्स बनाए हैं। रिज़ॉल्यूशन। कंपनी रोटरी पीस एंड कॉन्फ्लिक्ट रिज़ॉल्यूशन प्रोग्राम नाम का एक ग्रेजुएट स्टडीज़ प्रोग्राम भी देती है, जिसके लिए हर साल 75 स्कॉलर्स चुने जाते हैं। हम वर्ल्ड अंडरस्टैंडिंग एंड पीस डे में उस बदलाव में योगदान देना चाहते हैं जो ग्लोबल लेवल पर तालमेल और समझ को बढ़ावा दे। उम्मीद है, इसका नतीजा युद्धों का खत्म होना होगा। दुनिया भर में, रोटरी इंटरनेशनल शांति को बढ़ावा देने के लिए काम करता है। यह एक ज़रूरी जगह है जहाँ लोग ज्ञान पा सकते हैं और शांति को आगे बढ़ा सकते हैं। यह जानना कि हममें से हर कोई दुनिया की शांति में कैसे योगदान दे सकता है, रोटरी के वर्ल्ड अंडरस्टैंडिंग एंड पीस डे से मिला एक शानदार मौका है।विश्व शांति और समझ दिवस के उद्देश्य हिंसा या क्रूरता से रहित दुनिया के निर्माण व विश्व में शांति लाने के उद्देश्य के लिए इस दिवस को मनाया जाता है। दुनिया में शांति और समझ पैदा करना पूरी मानव जाति का कर्तव्य है। समाज में समझ से ही शांति स्थापित की जा सकती है। इसके लिए सामूहिक प्रयास करने की आवश्तकता है। इसके विपरित यदि, पूरी दुनिया के लोग एक दूसरे को घृणा और नफरत की दृष्टि से देखेंगे तो उसका परिणाम युद्ध औऱ विनाश के रूप में सामने आएगा। संघर्ष, अविश्वास, गलतफहमी और विद्रोह समजा को बांटता है और उसे एक अन्नत संघर्ष की खाई में धकेल देता है। इसलिए समाज में विश्वास और शांति स्थापित करने के लिए सभी मनुष्यों को एक दूसरे के साथ कंधे से कंधा मिलाकर सहयोगी के रूप में कार्य करना होगा। विश्व शांति और समझ दिवस का इतिहास विश्व में शांति और समझ की भावना विकसित करने को लेकर 23 फरवरी 1905 को पहली रोटरी बैठक हुई थी। इसके लिए शिकागो शहर की यूनिटी बिल्डिंग के रूम नंबर 711 में पॉल हैरिस, गुस्तावस लोएहर, सिल्वेस्टर शिएले और हीराम शोरे लोहर जैसी हस्तियां एकत्रित हुई थी। अटॉर्नी पॉल हैरिस एक पेशेवर संघ बनाना चाहते थे इसलिए उन्होंने यह सभा बुलाई थी। इन हस्तियों के मिलने के स्थान “रोटेट” होते रहते थे इसलिए हैरिस, गुस्तावस लोहर, सिल्वेस्टर शिएले और हीराम शौरी ने अपने इस क्लब का नाम रोटरी क्लब रखा था। बाद में इस क्लब में मानवीय मूल्यों के लिए अपनी इच्छा साझा करने वाले लोगों का समूह जुड़ता गया। हालांकि रोटरी क्लब ने औपचारिक रूप से साल 1922 में ‘रोटरी इंटरनेशनल’ नाम को अपनाया था। विश्व शांति और समझ दिवस दुनिया के सबसे बड़े धर्मार्थ संगठनों में से एक के निर्माण की वर्षगांठ की याद दिलाता है। इस संगठन की स्थापना की याद में हर साल ‘विश्व शांति और समझ दिवस‘ मनाया जाता है। इस साल विश्व शांति और समझ दिवस की 117वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है। इन वर्षों के दौरान पूरी दुनिया ने विश्व शांति और सद्भावना को लेकर लंबा रास्ता तया किया है। वहीं दुनिया भर के लोगों में सद्भावना, शांति और समझ विकसित करने के लिए अभी और लंबा रास्ता तय करना है। विश्व शांति और समझ दिवस का महत्व दुनिया भर के लोगों के बीच शांति और सामान्य समझ को बढ़ावा देने के लिए यह दिवस बेहद महत्वपूर्ण है। इस दिवस पर दुनिया में शांति और समझ विकसित करने के लिए प्रयासों को बढ़ावा दिया जाता है। दुनिया भर में लोगों और राष्ट्रों के बीच शांति और संघर्षों के बीच प्रचलित गलतफहमी को देखते हुए इस दिवस का महत्व और बढ़ जाता है।आज परमाणु युद्ध का माहौल बन रहा है इसलिए जरुरी है विश्व शांति और समझ की विज्ञान की प्रगति के साथ विश्वभर में चारों ओर विकास ने नई करवट ली है। विकास के नित नये आयामों से सभी देश अपनी समृद्धि को तीव्र वेग से आगे बढ़ाने में जुट गये हैं। जिसके कई सुखद परिणाम भी सामने आये हैं। विज्ञान ने चिकित्सा स्वास्थ्य, कृषि, उद्योग, यातायात, दूरसंचार, युद्ध उपकरणों इत्यादि सभी क्षेत्रों में आशातीत प्रगति की है और इस ओर अभी भी वैज्ञानिकों का प्रयास जारी है। इस कारण आधुनिक भौतिक साधनों ने इन्सानों का जीवन ही बदल दिया है। सभी देश विज्ञान के आधार पर अपने देश को प्रगतिशील,समृद्धशाली, शक्तिशाली बनाने की होड़ में लगे हुए हैं। इस होड़ अर्थात् प्रतिस्पर्धा को लेकर सभी देश अपनी सुरक्षा के लिए अस्त्रा-शस्त्रों का उत्पादन करने में जुट गये हैं।रूस और यूक्रेन के युद्ध में निर्दाेष नागरिकों की बहुत अधिक संख्या में जान जा रही है और लोगों का जीवन अस्त व्यस्थ हो गया है इस जंग में यूक्रेन व रूसी सैनिकों की भी मौत हो रही है एक देश दुसरे देश के शक्ति प्रदर्शन के चक्कर में अपने देश का ही नहीं बल्कि पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था तबाह हो रही है व विश्व शांति पर खतरा मंडराने लगा है 6 महीने से चल रहे इस युद्ध में केवल तबाही मची है व बेगुनाह लोगों की मौत हो रही है अब ऐसा लग रहा है कि यह युद्ध में कहीं परमाणु अस्त्रों का इस्तेमाल न हो जाए लेकिन ऐसा किस उद्देश्य के लिए हो रहा होगा उधर चीन और ताईवान मेँ भी युद्ध के बादल मंडरा रहें हैं जैसा चीन और अमेरिका के वक्तवय व ताईवान की सीमा पर चीन द्वारा लगातार युद्धाभ्यास से नजर आ रहा है दोनों देश के पास परमाणु अस्त्रओं का भंडार है अतः आज विश्व मेँ परमाणु हमले का खतरा मंडरा रहा है जिसके शिकार निर्दोष जनता को भुगतना पड़ सकता है इसके अलावा जो आस पास के देश होंगे वहां भी एटम बम के विस्फोट से रेडिशन फ़ैल जाएगा और इसका खामियाजा उन देशों को रेडीएशन की मार से कैंसर, शारीरिक विकृति के शिकार हो सकते हैं इससे सिर्फ आस पास के देश ही नहीं बल्कि पूरा विश्व वैश्विक तापन की मार झेल सकता है क्योंकि परमाणु अस्त्र के विस्फोट से ओजोन परत इस कदर से नाश होगा कि पूरा विश्व ही ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव से प्रभावित होगा.इस पर चिंतन करने की आवश्यकता है आज सारे देश में हथियार खरीदने की होड़ लगी है इसे रोकना चाहिएएइस कारण नित्य नये-नये घातक अस्त्रा-शस्त्रों का निर्माण हो रहा है जो कभी भी विनाश के कारण बन सकते हैं। अस्त्रा-शस्त्रों की बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण सम्पूर्ण विश्व चिंतन के सागर में डूबा हुआ है। इससे बचने के लिये सभी देश, जो स्वयं अपनी सुरक्षा के लिये चिंतित होने पर भी अस्त्रा-शस्त्रा के भंडारण में जुटे हुए होने के बाद भी विश्व शान्ति के लिये निःशस्त्रीकरण का राग अलापते थकनहीं रहे हैं।विध्वंशकारी अस्त्र-शस्त्रों से विनाश की स्थिति को जानते हुए भी कई देशों ने एक-दूसरे देश पर आक्रमण कर विनाश लीला का खुला तांडव खेला है। जिसके दुष्परिणामों ने असंख्य इन्सानों की जान ली है। वहाँ अनगिनत देश की समृद्धि की झलक दिखाने वाले निर्माण कार्यों को विध्वंश कर दिया है। चारों ओर तबाही मचाने में किसी प्रकार की कमी नहीं रखी है। विकास को विनाश में बदल दिया है। इस आक्रमणकारी नीति से बचने के लिये सभी अपने देश में शान्ति, खुशहाली, समृद्धि के पक्ष में निःशस्त्रीकरण की फिराक में रहते हैं और इसके लिए सभी देशों का जन समर्थन जुटाने में कटिबद्ध हैं। क्योंकि सभी को विनाश का खतरा सामने दिखाई देता है। आज दुनिया परमाणु युद्ध की तरफ बढ़ रहा है इसके परिणाम हम सभी जानते हैं 76 साल पहले 6 अगस्त 1945 को अमेरिका ने जापान के हिरोशिमा शहर पर दुनिया का पहला परमाणु बम हमला किया था. इसके तीन दिन बाद जापान के ही नागासाकी शहर पर दूसरा परमाणु बम गिराया गया. दोनों शहर लगभग पूरी तरह तबाह हो गए. डेढ लाख से अधिक लोगों की पल भर में जान चली गई और जो बच गए वो अपंग हो गए और आज भी जो बच्चे जन्म लेते हैं वे अपंगता के शिकार होते हैं क्योंकि रेडिएशन का खतरा 100वर्षों य़ा इससे भी अधिक रहता हैव जिसकी मार मासूम लोगों को भुगतना पड़ता हैए इसके लिये सभी देशों को निर्दाेष इन्सानों की रक्षा हेतु परमाणु निःशस्त्रीकरण का संकल्प लेने पर जोर दिया है ताकि कभी भी किसी देश पर आक्रमण करने की स्थिति ही नहीं बने। विश्व में अस्त्र-शस्त्रों की होड़ ही आक्रमणकारी बनाने का माध्यम बनती है। वहाँ इन्सान भी आवेश, आक्रोश,गुस्से, बदले की भावना, किसी को प्रताड़ित करने के उद्देश्य से, किसी का तिरस्कार करने, किसी को दंडित करने के लिये आक्रामक रुख अपनाते हुए आक्रमणकारी होता है तो उसके सामने, सामने वाले के विनाश के अलावा कुछ दिखाई नहीं देता है। आक्रमणकारी की चाह रहती है कि वह जो आक्रमण कर रहा है वह विफल न हो जावे व परमाणु बम के हमला की आशंका बढ़ जाती है । इस कारण इन्सान-इन्सान में घृणा, द्वेषभाव, ईर्ष्या, दुश्मनी आदि उत्पन्न होती है जो इन्सानों की सुख-शांति, अमनचैन छीनती है। ऐसी आक्रमणकारी नीति से बचने के लिये और विश्व में शान्ति स्थापित करने हेतु परमाणु निःशस्त्रीकरण पर अधिक बल देना चाहिए। इसी सुख-शान्ति अमन-चैन के साथ एक-दूसरे के प्रति भाईचारे के भाव बनाने के लिए इन्सान को अन्य किसी इन्सान पर आक्रमणकारी नहीं बल्कि सहयोगी बन कर रहने में ही भलाई है। इससे आक्रमणकारी को भी शांति और संतोष मिलता है। बुरे विचार इसके दिल और दिमाग से हट जाते हैं। ऐसी मानसिक शांति पाने के लिये आक्रमणकारी नहीं बनने की सीख आचार्य तुलसी ने देश की आजादी के बाद मानवता आंदोलन चलाकर विश्व को एक नई दिशा दी। मानवता के आधार पर इन्सान यह सोचे कि मैं आक्रमणकारी नहीं बनूं और न ही सहयोग दूंगा। इस दृढ़ संकल्प द्वारा वह शांति का शंखनाद करने में कदापि पीछे नहीं रहेगा। वर्तमान में इसकी महत्ती आवश्यकता है। इसी प्रकार एक-दूसरे देश पर आक्रमण करता है तब अन्य देश आपस में लड़ने वाले किसी एक देश की आक्रामक नीति में भागीदार बनता है, उसे ममदद देता है, सहयोगी के रूप से दुश्मन समझने वाले देश से युद्ध करता है तब वहाँ सर्वत्रा विनाश ही विनाश होने की संभावना बढ़ती है। ऐसी विषम स्थिति में विश्व शांति को कभी भी खतरा उत्पन्न हो सकता है। विनाश की इस स्थिति से अपने को दूर रखने के लिए आक्रामक देश को समर्थन सहयोग नहीं देने का संकल्प अणुव्रतों को आधार मानकर किया जाय तो विश्व शांति की स्थिति बन सकती है और इन्सानों को अकाल मृत्यु, बेमौत मरने से बचाया जा सकता है। वहाँ परिवार और समाज में स्नेह, आत्मीयता,भाईचारे की भावना के साथ सहयोग एवं सहानुभूति कर संकल्प लिया जाय तो इन्सान का जीवन स्वर्गमय बन सकता है। ऐसे इन्सान को सुख, चैन, शान्ति से जीवनयापन करने से कोई रोक नहीं सकता।निःशस्त्रीकरण आज की मांग है। इस बात की आवश्यकता है कि उचित निदान द्वारा विश्वजनित मतभेदों को भुलाकर अशांति का माहौल खत्म किया जाए। अतः युद्ध से अलग शान्ति और अच्छी समझ ही मानवता की रक्षा एक सराहनीय कदम है। (यह लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं इससे संपादक का सहमत होना अनिवार्य नहीं है) .../ 22 फरवरी /2026