अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सारी दुनिया में चर्चा हो रही है। पिछले एक वर्ष में जिस तरह से उन्होंने निर्णय लिए हैं उनके निर्णय के कारण जिस तरह की अनिश्चित अमेरिका के साथ-साथ सारी दुनिया के देशों में देखने को मिल रही है, उसके बाद लोग यह कहने लगे हैं, कि गिरगिट भी देर से रंग बदलता है लेकिन ट्रंप उससे जल्दी रंग बदल लेते हैं। हाल ही में अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा विभिन्न देशों के ऊपर जो टैरिफ लगाए गए थे उसे निरस्त कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने उसे अवैधानिक माना है। इसके तुरंत बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक नया फैसला लिया, जिसमें 10 फ़ीसदी टैरिफ को लगाने का फैसला किया था। अदालत के फैसले के कुछ ही घंटे के बाद उन्होंने शुक्रवार को 10 फ़ीसदी टैरिफ लगाने की घोषणा की थी, लेकिन शनिवार को उसे बढ़ाकर 15 फ़ीसदी कर दिया। 24 फरवरी से 24 जुलाई तक सभी देशों की अलग-अलग दरों के स्थान पर अगले 150 दिन अर्थात 15 जुलाई तक 15 फ़ीसदी टैरिफ़ वसूल किया जाएगा। इसका असर भारत पर भी पड़ने जा रहा है। भारत के फार्मा ऒर पेट्रो पर तीन फ़ीसदी टेरिफ़ लगेगा लेकिन बाकी सभी चीजों पर अब 15 फ़ीसदी टैरिफ अमेरिका में जो भी माल भेजा जाएगा उस पर लगेगा। भारत के संबंध में बात की जाए तो पहले उन्होंने 50 फ़ीसदी टैरिफ लगाया, 2 फरवरी को अंतरिम ट्रेड डील पर सहमति जताते हुए टैरिफ को 18 फ़ीसदी किया था। उसके बाद 10 फीसदी टैरिफ लगाया गया। अब उसे बढ़ाकर 15 फ़ीसदी कर दिया गया है। दूसरी बार अमेरिका के राष्ट्रपति बनने के बाद जिस तरह की अनिश्चितता अमेरिका को लेकर सारी दुनिया में देखने को मिल रही है उसमें भले अभी ट्रंप को कुछ फायदा हो रहा हो लेकिन जिस तरह से अमेरिका की साख को बट्टा लग रहा है उसके बाद सारी दुनिया में यह धारणा बनने लगी है अमेरिका को जिस दिशा में डोनाल्ड ट्रंप ले जाना चाहते हैं। उसके कारण अमेरिका कुछ ही महीना में बहुत बड़ी मुसीबत में फंस सकता है। डोनाल्ड ट्रंप द्वारा जो निर्णय लिए जा रहे हैं इसका सबसे बड़ा दुष्प्रभाव अमेरिका के ऊपर ही पड़ रहा है। अमेरिका में लगातार महंगाई बढ़ती जा रही है। अमेरिका की ट्रेजरी से विभिन्न देशों ने अपना सोना और बांड के रूप में जमा राशि को निकालना शुरू कर दिया है। अमेरिका की जो विश्व में साख पिछले कई दशकों में बनी हुई थी वह तार-तार हो गई है। कारोबारी और विभिन्न देशों की सरकारों को अमेरिका के ऊपर भरोसा नहीं रहा, जिसके कारण अमेरिका अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश को नहीं मानकर उन्होंने वैकल्पिक तरीके से सारी दुनिया के देशों से जो 15 फ़ीसदी टैक्स एक जजिया-कर की तरह वसूल करने की कोशिश की है, वह अपने निर्णय के माध्यम से दबाव बनाकर दुनिया के विभिन्न देशों में अपने परिवार और पारिवारिक कंपनियों को जो लाभ पहुंचाना चाहते हैं उसकी यह रणनीति चर्चा का विषय बन गई है। कारोबारी और विभिन्न देशों की सरकारें अमेरिका से दूरी बनाने लगी है। अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए भी आंतरिक चुनौतियों राजनीतिक आधार पर बनना शुरू हो गई हैं। सड़कों पर उनका विरोध शुरू हो गया है। विभिन्न राज्यों में डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ संघीय व्यवस्था को खत्म करने और डिक्टेटर वाले निर्णय लेने से बगावत जैसी स्थिति देखने को मिलने लगी है। अमेरिका कभी पूरी दुनिया का नेतृत्व करता था लेकिन अब यह स्थिति बदलती हुई दिख रही है। रूस, चीन जैसे देश अमेरिका के समानांतर एक नई वैकल्पिक व्यापारिक व्यवस्था विकसित करने की बात कर रहे हैं। वैकल्पिक मुद्रा तैयार कर रहे हैं। जिसको दुनिया के अन्य देशों का भी बड़े पैमाने पर समर्थन मिल रहा है। अभी तक अमेरिका को जो डॉलर के कारण कमाई हो रही थी अब वह कमाई भी खतरे में पडती हुई दिख रही है। डोनाल्ड ट्रंप बहुत जल्दबाजी में है। उनके कार्यकाल का एक वर्ष एक माह लगभग खत्म हो चुका है उनके लिए 2 वर्ष और 11 में शेष हैं। इस बीच में वह अपने परिवार और अपने लिए वह सब कुछ कर लेना चाहते हैं जो वह सोचते हैं। लेकिन यह संभव नहीं होगा। डोनाल्ड ट्रंप के निर्णयों के कारण अमेरिका के साथ-साथ सारी दुनिया के देशों में उनका विरोध बढ़ता चला जा रहा है। व्यापार और संबंध मैं विश्वास होना जरूरी होता था। वह विश्वास डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिका के ऊपर देखने को नहीं मिल रहा है। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद जिस तरह से डोनाल्ड ट्रंप आक्रामक होकर मनमाने फैसले ले रहे हैं उसके बाद यह माना जा रहा है कि जल्द ही उनके खिलाफ अमेरिका में विद्रोह शुरू हो सकता है। डोनाल्ड ट्रंप बहुत जिद्दी हैं। यह उनका व्यक्तिगत दुर्गुण है, जिसका खामियाजा आगे चलकर अमेरिका को चुकाना पड़ेगा। इसमें अब कोई संदेह नहीं रहा। ईएमएस / 22 फरवरी 26