- सरकार को छह माह में ट्रायल पूरी करने के निर्देश, वर्तमान अंतरराष्ट्रीय हालात के संदर्भ में कोर्ट का निर्णय इन्दौर (ईएमएस) मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय खंडपीठ इन्दौर में जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की युगलपीठ ने एक महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई उपरांत मामले की गंभीरता के साथ अंतराष्ट्रीय परिस्थितियों को देखते हुए एक बांग्लादेशी महिला को जमानत के बावजूद छोड़ने से इनकार करते राज्य सरकार को निर्देश दिए कि उसके खिलाफ ट्रायल छह माह के भीतर पूर्ण कराई जाए। निर्धारित अवधि में ट्रायल में प्रगति नहीं होने पर याचिकाकर्ता को पुनः न्यायालय आने की स्वतंत्रता रहेगी। बांग्लादेशी महिला लिया उर्फ रीमा जो कि जेल में बंद है और उसकी जमानत होने के बाद यह बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की गई थी। याचिका में रीमा को हाईकोर्ट से जमानत मिलने के चलते जेल से रिहा करने, ट्रायल छह माह में पूरा करने, प्रत्यावर्तन की प्रक्रिया शुरू करने, जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ जांच की मांग की गई थी। याचिका सुनवाई दौरान अभियोजन की ओर से कोर्ट को बताया गया कि महिला एक व्यक्ति को जबरदस्ती बंधक बनाने, फिरौती मांगने और अन्य अपराधों के साथ बगैर इजाजत भारत में रहने जैसी गंभीर धाराओं में आरोपी है। उसे जमानत मिल चुकी है, लेकिन मुकदमा लंबित है। नियमों के तहत उसे अस्थायी डिटेंशन सेंटर में रखा गया है। इंदौर कलेक्टर ने जिला जेल को ही अस्थाई डिटेंशन सेंटर घोषित किया है। अभियोजन दलील उपरांत कोर्ट ने महिला को इस टिप्पणी के साथ छोड़ने की अनुमति देने से इंकार कर दिया कि उसके खिलाफ ट्रायल लंबित है और कभी भी आरोपी की उपस्थिति आवश्यक हो सकती है। साथ ही वर्तमान अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को देखते हुए उसकी सुरक्षा के दृष्टिकोण से डिटेंशन सेंटर में रखा जाना उचित होगा। कोर्ट ने राज्य सरकार को यह भी निर्देश दिया है कि मामले की सुनवाई छह माह के भीतर पूर्ण कराई जाए। निर्धारित अवधि में ट्रायल में प्रगति नहीं होने पर याचिकाकर्ता को पुनः न्यायालय आने की स्वतंत्रता रहेगी। आनंद पुरोहित/ 24 फरवरी 2026