राष्ट्रीय
24-Feb-2026


नए पीएमओ की पहली बैठक में प्रस्ताव को मंजूरी दी गई नई दिल्ली,(ईएमएस)। आमतौर पर विपक्ष की ओर से कोई प्रस्ताव केंद्र के पास आता है, तब उस प्रस्ताव पर लंबी बहस होती है, कई बार फाइलें अटक जाती हैं। लेकिन जब बात केरल की होती हैं, तब मामला बदल जाता है। केरल की वामपंथी (एलडीएफ) सरकार ने राज्य का नाम बदलकर ‘केरल’ से ‘केरलम’ करने का प्रस्ताव भेजा था। और मंगलवार को केंद्रीय कैबिनेट ने बिना किसी लंबी खींचतान के केरल सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। आखिर ऐसा क्या हुआ कि मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की कम्युनिस्ट सरकार के प्रस्ताव पर मोदी सरकार ने इतनी जल्दी मुहर लगा दी? ‘ सबसे पहले फैसले के समय और जगह जान लेना जरूरी है। केरल को केरलम करने का फैसला नए सेवा तीर्थ में बने पीएमओ में हुई पहली बैठक में हुआ। केंद्रीय कैबिनेट ने राज्य सरकार के उस प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है, जिसमें संविधान की पहली अनुसूची और सभी आधिकारिक भाषाओं में राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने की मांग की गई थी। सबसे ज्यादा चर्चा इसी बात की है कि मोदी सरकार ने इतनी आसानी से हामी कैसे भर दी। इसके पीछे कूटनीति, राजनीति और समय का एक बहुत बड़ा मास्टरस्ट्रोक छिपा है। दरअसल यह फैसला तब आया है जब केरल में अप्रैल-मई के महीने में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। बीजेपी पिछले कई सालों से केरल में अपना सियासी आधार मजबूत करने में जुटी है। दक्षिण भारत में अपनी पैठ बनाने के लिए केरल बीजेपी के लिए एक बहुत अहम राज्य है। केरल के लोग अपनी भाषा ‘मलयालम’ और अपनी संस्कृति को लेकर बेहद संवेदनशील हैं। अगर मोदी सरकार इस प्रस्ताव को खारिज करती या लटकाए रखती, तब वामपंथी गठबंधन (एलडीएफ) और कांग्रेस के नेतृत्व वाला गठबंधन (यूडीएफ) इस मामले को चुनाव में एक बड़ा मुद्दा बना देते। लेकिन केंद्र की मोदी सरकार ने तुरंत मंजूर करके विपक्ष के हाथ से यह बड़ा चुनावी मुद्दा छीन लिया है। अब बीजेपी केरल की जनता के बीच यह कह सकती है कि हम आपकी मातृभाषा और आपकी क्षेत्रीय पहचान का पूरा सम्मान करते हैं। ‘केरलम’ शब्द का असली मतलब क्या है? पहली बात, मलयालम भाषा बोलने वाले लोग हमेशा से अपने राज्य को ‘केरलम’ ही कहते आए हैं। यह कोई नया नाम नहीं है, बल्कि यह इस जमीन का मूल नाम है। इस नाम के पीछे मुख्य रूप से दो कहानी मानी जाती हैं। दरअसल मलयालम भाषा में ‘केरा’ का मतलब होता है ‘नारियल का पेड़’ और ‘अलम’ का मतलब होता है ‘जमीन’ या ‘भूमि’। केरल में नारियल की बहुतायत है, इसलिए इन दोनों शब्दों को मिलाकर ‘केरलम’ बना, जिसका शाब्दिक अर्थ है ‘नारियल के पेड़ों की भूमि’। ‘चेर राजवंश’ से उत्पत्ति इतिहासकारों का एक बड़ा वर्ग मानता है कि यह नाम प्राचीन ‘चेर’ राजवंश से आया है। प्राचीन काल में इस क्षेत्र पर चेर राजाओं का शासन था। अशोक के शिलालेखों में भी ‘चेरापुत्र’ शब्द का जिक्र मिलता है। माना जाता है कि ‘चेरम’ शब्द ही समय के साथ भाषाई अपभ्रंश के कारण ‘केरलम’ में बदल गया। फिर नाम ‘केरल’ कैसे पड़ गया? अब सवाल यह आता हैं कि अगर मूल नाम केरलम था, तब सरकारी कागजों में यह ‘केरल’ कैसे बन गया? इसकी जड़ें भारत की आजादी और राज्यों के पुनर्गठन में छिपी हैं। 1 नवंबर 1956 को जब ‘राज्य पुनर्गठन अधिनियम’ के तहत भाषा के आधार पर राज्यों का गठन हो रहा था, तब मलयालम बोलने वाले क्षेत्रों मालाबार, कोचीन और त्रावणकोर को मिलाकर एक नया राज्य बनाया गया। संविधान का मसौदा तैयार करने वाले और अंग्रेजीदां नौकरशाहों ने इसका अंग्रेजी अनुवाद ‘केरल’ कर दिया। वहीं उत्तर भारत और हिंदी पट्टी में इस‘केरल’ कहा जाने लगा। हालांकि, संविधान की आठवीं अनुसूची में मान्यता प्राप्त भाषा ‘मलयालम’ है, लेकिन राज्य का नाम ‘केरल’ ही दर्ज किया। आशीष दुबे / 24 फरवरी 2026