ज़रा हटके
25-Feb-2026
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तेहरान,(ईएमएस)। मध्य पूर्व में युद्ध के बादल मंडरा रहे हैं लेकिन इस बार जंग सिर्फ बारूद और मिसाइलों की नहीं बल्कि अदृश्य तरंगों से होने वाली है। ईरान ने अपनी रक्षा पंक्ति में एक ऐसा हथियार शामिल किया है जो पेंटागन की रातों की नींद उड़ाने के लिए काफी है। इसका नाम है कोबरा वी8 है। यह ईरान का वहां स्वदेशी इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम है, इस विशेषज्ञों ने अदृश्य दीवार का नाम दिया है। दावा है कि यह सिस्टम दुनिया के सबसे आधुनिक लड़ाकू विमानों और ड्रोन के झुंड को महज एक खिलौना बनाकर हवा में ही बेकार कर सकता है। कोबरा वी8 ईरान की इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस और जैमिंग क्षमता का शिखर है। इस रूस के विख्यात क्रासुखा सिस्टम का ईरानी संस्करण माना जा रहा है। यह सिस्टम करीब 250 से 300 किलोमीटर के दायरे में दुश्मन के रडार, रेडियो सिग्नल और सैटेलाइट संचार को बाधित करने की क्षमता रखता है। कोबरा वी8 का मुख्य काम दुश्मन के ‘अर्ली वार्निंग’ विमानों और लड़ाकू विमानों के रडार को अंधा करना है। जब यह सिस्टम सक्रिय होता है, तब दुश्मन के पायलट की स्क्रीन पर या कुछ नहीं दिखता या फिर हजारों फर्जी टारगेट नजर आने लगते हैं जिससे वे सही निशाना नहीं लगा पाते। आधुनिक युद्ध में ड्रोन स्वार्म (ड्रोन्स का झुंड) सबसे बड़ा खतरा है। कोबरा वी8 इन ड्रोन के कंट्रोल सिग्नल और जीपीएस को जाम कर देता है जिससे वे या तब जमीन पर गिर जाते हैं या फिर दिशा भटक कर वापस लौट जाते हैं। ईरान-अमेरिका तनाव के बीच कोबरा वी8 की तैनाती ने सामरिक संतुलन बदल दिया है। अगर अमेरिकी एफ-35 जैसे स्टेल्थ फाइटर या एमक्यू-9 रीपर जैसे ड्रोन ईरानी हवाई क्षेत्र के करीब आते हैं, तब कोबरा वी8 उनके सेंसर को जाम कर सकता है। क्या है अमेरिका के पास इसका तोड़? अमेरिका खतरे से बेखबर नहीं है। पेंटागन ने इसके जवाब में इलेक्ट्रॉनिक अटैक एयरक्राफ्ट और नए एंग्री किटन जैमिंग पॉड्स को तैनात किया है। ये सिस्टम डिजिटल रेडियो फ्रीक्वेंसी मेमोरी का उपयोग करते हैं जो दुश्मन के जैमिंग सिग्नल को पकड़कर उस वापस उन्हीं की ओर मोड़ देते हैं। यह एक तरह का सिग्नल युद्ध है जहां जो पहले डिकोड करेगा, वही जीतेगा। आशीष/ईएमएस 25 फरवरी 2026