ज़रा हटके
25-Feb-2026
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लंदन (ईएमएस)। शोधकर्ता वैज्ञानिकों को इंग्लैंड के होली इसलेंड पर 350 मिलियन वर्ष पुराना बेहद दुर्लभ जीवाश्म मिला है, जो देखने में मानो मुस्कुराते हुए नकली दांतों जैसा लगता है। इसकी पुष्टि ब्रिटिश ज्योलॉजिकल सर्वे (बीजीएस) ने की है। उनके मुताबिक, कयह जीवाश्म दरअसल प्राचीन समुद्री जीव क्रिनोएड के तने का हिस्सा है, जिसे ‘सी लिली’ भी कहा जाता है। इस अनोखे फॉसिल को खोजने वाली 64 वर्षीय क्रिस्टीन क्लार्क थीं, जो बॉक्सिंग डे के दिन नॉर्थम्बरलैंड के समुद्र तट पर टहल रही थीं। रेत और कंकड़ों के बीच उन्हें एक छोटा-सा पत्थर दिखाई दिया जो बिल्कुल इंसान के नकली दांतों जैसा लग रहा था। क्रिस्टीन ने हंसते हुए कहा “ऐसा लग रहा था जैसे वह मुझे देखकर मुस्कुरा रहा हो।” उन्होंने इसकी तस्वीर एक फॉसिल आइडेंटिफिकेशन पेज पर शेयर की, जिसके बाद हजारों प्रतिक्रियाएं आईं और विशेषज्ञों ने तुरंत पहचान ली कि यह कोई साधारण पत्थर नहीं है। बीबीसी ने बताया कि पहचान के लिए बीजीएस के सीनियर पैलेन्टोलॉजिस्ट डॉ. जान हेनिसन से संपर्क किया गया। उन्होंने बताया कि क्रिनोइड्स पृथ्वी पर लगभग 50 करोड़ वर्ष पहले कैम्ब्रियन काल में प्रकट हुए थे और आज इन्हें पृथ्वी के सबसे पुराने जटिल समुद्री जीवों में गिना जाता है। हालांकि ये जानवर हैं, लेकिन फूल जैसे आकार की वजह से इन्हें ‘सी लिली’ नाम दिया गया। वैज्ञानिकों के अनुसार क्रिस्टीन को मिला यह जीवाश्म लगभग 35 करोड़ वर्ष पुराना है। डॉ. हेनिसन ने बताया कि क्रिनोइड के तने को ‘ओसिकल्स’ नामक छोटी डिस्कें बनाती हैं। क्रिस्टीन के हाथ लगा जीवाश्म इन्हीं डिस्कों की एक पंक्ति यानी ‘कॉलमनल’ है। लाखों वर्षों में यह तना लंबाई में फट गया और मुड़कर ऐसा आकार ले लिया कि यह किसी मुस्कुराते चेहरे या दांतों की पंक्ति जैसा दिखाई देने लगा। होली आइलैंड पर क्रिनोइड जीवाश्म मिलने की परंपरा सदियों पुरानी है। यहां मिलने वाले छोटे गोल जीवाश्मों को ‘कडी बीड्स’ कहा जाता है, जिनका संबंध सेंट कुथबेर्ट से जोड़ा जाता है। 1300 के दशक में लोग मानते थे कि ये मोती संत कथबर्ट की आध्यात्मिक शक्ति से बनते थे। लोग इन्हें इकट्ठा कर भगवान के करीब होने की भावना रखते थे। सुदामा/ईएमएस 25 फरवरी 2026