जम्मू (ईएमएस)। भारी बारिश और बादल फटने से 21,000 ढांचे क्षतिग्रस्त हुए, जिसमें अधिकतर रिहायशी मकान थे। 1,515 मवेशियों की मौत हुई। 14 अगस्त 2025 को किश्तवाड़ के चिशौती गांव में हुई विनाशकारी घटना में 63 लोगों की जान गई और कई घायल हुए, जबकि 30 लोग लापता रहे। 26 अगस्त को वैष्णो देवी मार्ग पर हुए भूस्खलन में 32 लोगों की मौत हुई और 20 अन्य घायल हुए। उमर सरकार ने राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष के तहत मृतकों, घायलों और मकानों के नुकसान के लिए मुआवजा वितरित किया। वित्त वर्ष 2025-26 में एसडीआरएफ के तहत कुल 289.39 करोड़ रुपये जारी किए गए, जिसमें 200.39 करोड़ जम्मू संभाग और 89 करोड़ कश्मीर संभाग को राहत एवं पुनर्वास कार्यों के लिए दिए गए। जम्मू संभाग में सबसे अधिक नुकसान हुआ, जहां 3,304 मकान पूरी तरह नष्ट, 1,818 गंभीर रूप से और 11,622 आंशिक रूप से प्रभावित हुए। 3,531 झोपड़ियां और पशु शेड नष्ट हुए, 1,461 मवेशियों की मौत हुई और 1,035 टिन शेड भी क्षतिग्रस्त हुए। कश्मीर संभाग में केवल 12 मकान पूरी तरह नष्ट हुए, 44 गंभीर रूप से और 597 आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए। 71 झोपड़ियों और पशु शेडों को नुकसान पहुंचा और 54 मवेशियों की मौत हुई। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 3 से 7 सितंबर 2025 के बीच नुकसान का आकलन करने के लिए अंतर-मंत्रालयी टीम भेजी और रिपोर्ट छह नवंबर 2025 को प्रस्तुत की। इसके बाद राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने पोस्ट डिजास्टर नीड असेसमेंट के लिए 17 से 25 नवंबर 2025 के बीच विशेषज्ञों की टीम भेजी। केंद्र सरकार ने इस आधार पर जम्मू-कश्मीर के लिए विशेष सहायता योजना के तहत 1,431 करोड़ रुपये आवंटित किए। इसके अलावा, एसडीआरएफ के तहत जारी 289.39 करोड़ रुपये के अतिरिक्त, कैपेक्स बजट 2025-26 के अंतर्गत फ्लड रिलीफ गतिविधियों के लिए 100 करोड़ रुपये (प्रत्येक जिले को 5 करोड़ रुपये) जारी किए गए। मुख्यमंत्री राहत कोष से किश्तवाड़ के चिशौती बाढ़ पीड़ितों को 207 लाख रुपये और पुंछ जिले के भूस्खलन प्रभावित गांवों को 45 लाख रुपये दिए गए। इस आपदा ने जम्मू-कश्मीर में मानव जीवन, संपत्ति और तीर्थ स्थलों पर गहरा प्रभाव डाला, जबकि राज्य और केंद्र सरकार द्वारा राहत एवं पुनर्वास के व्यापक प्रयास किए गए। आशीष दुबे / 25 फरवरी 2026