- एससी-एसटी एक्ट और गंभीर अपराधों के त्वरित निराकरण के दिए निर्देश - अपराधियों पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने की हिदायत गुना (ईएमएस)। ग्वालियर जोन के पुलिस महानिरीक्षक (IG) श्री अरविंद कुमार सक्सेना ने बुधवार को गुना जिला पुलिस कंट्रोल रूम में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक ली। इस बैठक में उन्होंने जिले की कानून व्यवस्था और पुलिस कार्यप्रणाली की बारीकी से समीक्षा की। बैठक के दौरान गुना पुलिस अधीक्षक श्री अंकित सोनी, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री मान सिंह ठाकुर सहित जिले के सभी अनुविभागीय अधिकारी (SDOP) और थाना प्रभारी मौजूद रहे। आईजी ने स्पष्ट किया कि पुलिसिंग में संवेदनशीलता और निष्पक्षता सर्वोपरि होनी चाहिए, ताकि पीड़ितों को समय पर न्याय मिल सके। बैठक का मुख्य केंद्र एससी-एसटी (SC-ST) एक्ट से संबंधित लंबित मामले रहे। आईजी श्री सक्सेना ने थानावार लंबित अपराधों, चालान और राहत प्रकरणों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन मामलों में अधिक संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाया जाए। उन्होंने जोर दिया कि वरिष्ठ अधिकारी इन प्रकरणों की सतत निगरानी करें और थानों में प्राथमिकता के आधार पर इनकी समीक्षा की जाए। साथ ही, एससी-एसटी बाहुल्य क्षेत्रों में जनचेतना शिविर लगाकर ग्रामीणों को उनके विधिक अधिकारों और शासन की कल्याणकारी योजनाओं के प्रति जागरूक करने के निर्देश भी दिए गए। गंभीर अपराधों पर लगाम लगाने के लिए आईजी ने जीरो टॉलरेंस की नीति पर जोर दिया। उन्होंने पुलिस अधिकारियों को निर्देशित किया कि जुआ, सट्टा, अवैध शराब, मादक पदार्थ, अवैध हथियार और पशु तस्करी के विरुद्ध अभियान चलाकर सख्त कार्यवाही की जाए। संपत्ति संबंधी अपराधों में सक्रियता दिखाने और शत-प्रतिशत रिकवरी सुनिश्चित करने के प्रयास करने को कहा गया। इसके अलावा, नाबालिगों के अपहरण के मामलों में तत्परता दिखाते हुए अपहृतों को जल्द से जल्द दस्तयाब करने की हिदायत दी गई। सीएम हेल्पलाइन और अन्य वरिष्ठ कार्यालयों से प्राप्त शिकायतों का समयावधि में संतुष्टिपूर्वक निराकरण करने पर भी विशेष बल दिया गया। आगामी त्यौहारों जैसे होली, ईद-उल-फितर, रामनवमी और अंबेडकर जयंती को दृष्टिगत रखते हुए जिले में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए विशेष कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए गए। आईजी ने कहा कि त्यौहारों के दौरान समुचित पुलिस व्यवस्था लगाई जाए ताकि सभी आयोजन शांतिपूर्वक संपन्न हो सकें। इसके साथ ही, असामाजिक तत्वों की सूची तैयार कर उन पर अधिक से अधिक प्रतिबंधात्मक कार्यवाही करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई अपराधी जमानत पर होने के बाद भी आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त पाया जाता है, तो उसकी जमानत निरस्तीकरण की प्रभावी कार्यवाही की जाए। अंत में, साइबर अपराधों के प्रति जन जागरूकता हेतु समय-समय पर कार्यक्रम आयोजित करने और थानों के रजिस्टरों को सुव्यवस्थित रखने के निर्देश देकर बैठक का समापन किया गया।- सीताराम नाटानी