-पीएम मोदी ने इजराइल दौरे पर किया इजराइल-भारत संबंधों का जिक्र सुनाया किस्सा नई दिल्ली,(ईएमएस)। पीएम नरेंद्र मोदी इजरायल दौरे पर हैं। बुधवार को पीएम मोदी ने इजराइल की संसद कनेसेट को संबोधित किया। बुधवार को दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों के संबोधन में रिश्तों की एक नई ऊंचाई की झलक दिखी। खास बात यह है कि पीएम मोदी से पहले इजराइली संसद कनेसेट को संबोधित करते हुए नेतन्याहू ने पीएम मोदी को ‘दोस्त से बढ़कर भाई’ बताया। पीएम मोदी ने कई बातों का जिक्र किया उन्होंने यह भी बताया कि उनका जन्म 17 सितंबर, 1950 को हुआ था। इसी दिन भारत ने इजराइल को मान्यता दी थी, लेकिन इससे भी खास उन्होंने अपने भाषण में 1971 के युद्ध में लेफ्टिनेंट जनरल जैक फर्ज राफेल जैकब के वीरतापूर्ण योगदान का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उनका योगदान व्यापक रूप से जाना जाता है और उन्होंने रिटायरमेंट के बाद उनसे चाय पर कई बातचीत की थीं, इसमें इजराइल-भारत संबंधों पर चर्चा हुई थी। पीएम मोदी का यह जिक्र सिर्फ इतिहास का संदर्भ नहीं था बल्कि भारत-इजराइल रिश्तों की गहराई और विरासत का प्रतीक भी था। 1971 के युद्ध में एक यहूदी मूल के भारतीय सैन्य अधिकारी ने ऐसी रणनीति बनाई, जिसने पाकिस्तान को घुटनों पर ला दिया और दुनिया के नक्शे पर एक नए देश बांग्लादेश का जन्म हुआ। यही वजह है कि आज जब भारत आधुनिक रक्षा साझेदारी की बात करता है तो 1971 की वह रणनीतिक जीत फिर चर्चा में आ जाती है। कई सैन्य विश्लेषकों के अनुसार ढाका के आसपास भारतीय सैनिकों की संख्या पाकिस्तानी सैनिकों की तुलना में बहुत अधिक नहीं थी, लेकिन युद्ध केवल संख्या से नहीं जीता जाता। भारतीय सेना ने रणनीतिक घेराबंदी और तेज मूवमेंट के जरिए ऐसी स्थिति बनाई कि पाकिस्तानी सेना खुद को पूरी तरह अलग-थलग महसूस करने लगी. भारतीय वायुसेना के नियंत्रण और संचार तंत्र के टूटने से पाकिस्तानी सैनिकों का मनोबल गिरा। जैकब की योजना का मकसद यही था कि युद्ध लंबा न खिंचे और बिना भारी नुकसान के निर्णायक परिणाम मिले जो सफल साबित हुआ। जैकब यहूदी मूल के भारतीय थे और कोलकाता के यहूदी समुदाय से संबंध रखते थे। उन्होंने हमेशा खुद को पहले भारतीय सैनिक माना, लेकिन उनकी पहचान भारत और यहूदी समुदाय के ऐतिहासिक रिश्तों का प्रतीक भी रही। भारत और इजरायल के बीच औपचारिक संबंध बाद में मजबूत हुए, लेकिन जैकब जैसे व्यक्तित्व दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और ऐतिहासिक जुड़ाव की मिसाल बने। इसी वजह से भारतीय नेतृत्व ने कई मौकों पर उनका जिक्र कर साझा मूल्यों लोकतंत्र, सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग को रेखांकित किया। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पीएम मोदी द्वारा जैकब का उल्लेख करना केवल ऐतिहासिक संदर्भ नहीं, बल्कि रणनीतिक संदेश भी माना जाता है। इसका उद्देश्य यह दिखाना था कि भारत-इजराइल संबंध केवल वर्तमान रक्षा सहयोग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि साझा इतिहास, मूल्यों और लोगों के योगदान पर आधारित हैं। 1971 की जीत नेतृत्व, साहस और रणनीतिक सोच का उदाहरण है। सिराज/ईएमएस 27 फरवरी 2026