पीएम मोदी सिर्फ दिखावे के लिए नाराजगी दिखा रहे नई दिल्ली (ईएमएस)। एनसीईआरटी की 8वीं के किताब में एक चैप्टर को लेकर हुए विवाद में कांग्रेस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमलावार है। कांग्रेस पार्टी ने आरोप लगाया है कि न्यायपालिका में भ्रष्टाचारवाले मुद्दे पर पीएम मोदी बनावटी आक्रोश दिखाई हैं। कांग्रेस सांसद और उसके संचार विभाग के प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी के बाद विवाद से अलग दिखाने की कोशिश हिपोक्रेसी के अलावा कुछ भी नहीं है। कांग्रेस नेता रमेश ने पोस्ट लिखा है, इजरायल में वास्तविक नैतिक कायरता दिखाने के बाद प्रधानमंत्री मोदी, अब एनसीईआरटी की पुस्तकों के मुद्दे पर बनावटी आक्रोश दिखा रहे हैं। साफ तौर पर डैमेज कंट्रोल की कोशिश के तहत यह संदेश दिया गया है कि वे एनसीईआरटी की पाठ्य पुस्तकों में न्यायपालिका के चैप्टर को लेकर बहुत नाखुश हैं। दरअसल, इस तरह संकेत मिले हैं कि प्रधानमंत्री मोदी ने (सुप्रीम कोर्ट के स्वत: संज्ञान लेने से पहले) ही कैबिनेट बैठक के दौरान एनसीईआरटी की किताब में न्यायपालिका को लेकर विवादास्पद चीजें शामिल करने पर नाराजगी जाहिर कर चुके थे। सूत्रों के अनुसार पीएम मोदी ने कहा था, आठवीं क्लास के बच्चों को सोशल साइंस के पाठ्य पुस्तक में हम क्या पढ़ा रहे हैं? लेकिन, कांग्रेस का आरोप है कि इस पूरे घटनाक्रम को लेकर खुद प्रधानमंत्री मोदी हैं। पार्टी सांसद ने लिखा है, एक दशक से उन्होंने इसतरह के शिक्षाविदों और झोला छाप अकादमिकों के नेटवर्क की अगुवाई की है, जिन्होंने अपने विचारधारात्मक वायरस से पाठ्य पुस्तकों को संक्रमित कर गंभीर नुकसान किया है। यह कोई आकस्मिक चूक नहीं, बल्कि एक सुनियोजित वैचारिक घुसपैठ अभियान का हिस्सा है...प्रधानमंत्री मोदी स्वयं नागपुर कम्युनल इकोसिस्टम फॉर रिराइटिंग ऑफ टेक्स्टबुक्स, जो असली एनसीईआरटी है, को दिशा और आकार देते रहे हैं। कांग्रेस नेता जयराम का कहना है, सुप्रीम कोर्ट को नाराज करने वाली पाठ्य पुस्तकों से खुद को अलग दिखाने की उनकी कोशिश सिर्फ एक हिपोक्रेसी है। अब सुप्रीम कोर्ट को अगला तार्किक कदम ये उठाना चाहिए कि वह इस बात की विस्तृत जांच करवाए कि पाठ्य पुस्तकों को किस तरह से फिर से लिखा गया और वे किस तरह ध्रुवीकरण तथा राजनीतिक हिसाब-किताब चुकाने के औजार में बदल दी गईं। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने खुद विषय पर स्वत: संज्ञान लेकर न्यायपालिका में भ्रष्टाचार वाले चैप्टर की एनसीईआरटी की आठवीं किताब को बैन किया है। भारत के चीफ जस्टिस (सीजेआई) सूर्यकांत की अगवाई वाली बेंच ने इस विवादित किताब के किसी भी फॉर्म में सर्कुलेशन पर रोक लगा दी है और स्कूल शिक्षा सचिव और एनसीईआरटी चेयरपर्सन को नोटिस जारी कर पूछा है कि उनके खिलाफ न्यायपालिका की अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए। आशीष दुबे / 27 फरवरी 2026