ज़रा हटके
01-Mar-2026
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वाशिंगटन (ईएमएस)। कई दशक पहले अधिकतर सर्जरी सर्जिकल ब्लेड से चीरा लगाकर की जाती थीं, लेकिन अब ज्यादातर सर्जरी लेजर के जरिए की जा रही हैं। मेडिकल साइंस में लगातार नए बदलाव हो रहे हैं और इलाज के लिए एडवांस टेक्नोलॉजी सामने आ रही हैं। आज आंख, स्किन, पेट, किडनी, दांत और कुछ कैंसर संबंधी ऑपरेशन भी लेजर की मदद से किए जा रहे हैं। अक्सर लोगों के मन में सवाल यह उठता है कि आखिर सर्जरी में लेजर लाइट का ही इस्तेमाल क्यों किया जाता है? हाल की जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक लेजर का पूरा नाम लाइट एंप्लिफिकेशन बाइ स्टिम्युलेटेड एमिशन ऑफ रेडिएशन है। लेजर लाइट फोकस्ड, एक दिशा में जाने वाली और हाई एनर्जी वाली वाली होती है। यही विशेषताएं इसे सर्जरी के लिए उपयुक्त बनाती हैं। लेजर की सबसे बड़ी खासियत उसकी सटीकता है। पारंपरिक सर्जिकल ब्लेड की तुलना में लेजर लाइट बहुत ही कंट्रोल तरीके से टिश्यूज को काट सकती है। लेजर सर्जरी में आसपास के स्वस्थ टिश्यूज को कम से कम नुकसान पहुंचता है, क्योंकि डॉक्टर बहुत छोटे और सटीक क्षेत्र पर एनर्जी केंद्रित कर सकते हैं। इससे ऑपरेशन के दौरान अनावश्यक कटाव और चोट की संभावना घट जाती है। यूएस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन की रिपोर्ट बताती है कि लेजर लाइट जब टिश्यूज को काटती है, तब वह सी समय छोटे ब्लड वेसल्स को सील भी कर देती है। इस प्रोसेस को मेडिकल साइंस में कोएगुलेशन कहा जाता है। इससे खून बहना कम होता है और सर्जरी ज्यादा सुरक्षित बनती है। पारंपरिक सर्जरी में ब्लीडिंग बहुत ज्यादा होती थी, लेकिन लेजर में ब्लीडिंग कम होती है। यही वजह है कि कई कॉस्मेटिक और डर्मेटोलॉजी प्रक्रियाओं में लेजर को प्राथमिकता दी जाती है। आजकल आंखों की अधिकतर सर्जरी लेजर लाइट से की जाती हैं, क्योंकि इससे कई तरह के खतरे कम हो जाते हैं। मेडिकल एक्सपर्ट्स की मानें तो लेजर का उपयोग इंफेक्शन के जोखिम को भी कम कर सकता है। लेजर सर्जरी में ब्लेड की तरह बॉडी से डायरेक्ट संपर्क नहीं होता है। इसलिए बैक्टीरिया के फैलने का खतरा घटता है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन के अनुसार सर्जरी के बाद इंफेक्शन दुनियाभर में एक बड़ी चुनौती है। लेजर तकनीक इस इंफेक्शन को कम करती है और मरीज की रिकवरी को बेहतर बना सकती हैं। हालांकि, यह भी स्पष्ट है कि संक्रमण की रोकथाम केवल लेजर पर निर्भर नहीं करती, बल्कि प्रॉपर प्रोटोकॉल पर आधारित होती है। लेजर सर्जरी का एक बड़ा फायदा फास्ट रिकवरी है। कम कट और कम ब्लीडिंग के कारण सूजन और दर्द भी कम होता है। आई डिजीज जैसे मोतियाबिंद या रेटिना संबंधी प्रक्रियाओं में लेजर का खूब इस्तेमाल किया जाता है। अमेरिकन एकेडमी ऑफ ऑप्थैल्मोलॉजी के अनुसार आंखों की कई बीमारियों में लेजर ट्रीटमेंट असरदार और अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जाता है। हालांकि इस तरह की सर्जरी हमेशा क्वालिफाइड एक्सपर्ट से ही करानी चाहिए। सुदामा/ईएमएस 01 मार्च 2026