चैन्नई (ईएमएस)। तमिलनाडु की सियासत में विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही गठबंधन की तस्वीर अब साफ होने लगी है। राज्य में सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) और कांग्रेस के बीच लंबे समय से चला आ रहा सीटों का गतिरोध खत्म होता दिख रहा है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कांग्रेस ने बिहार विधानसभा चुनाव के कड़वे अनुभवों से बड़ी सीख ली है। बिहार में महागठबंधन के बीच अंतिम समय तक सीट बंटवारा न हो पाने और कई सीटों पर फ्रेंडली फाइट के कारण मिली करारी हार को देखते हुए, इस बार तमिलनाडु में कांग्रेस ने व्यावहारिक रुख अपनाया है। डीएमके प्रमुख और मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने गठबंधन को एकजुट रखने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में डीएमके ने दो मुस्लिम दलों के साथ समझौता पक्का कर लिया है। पार्टी मुख्यालय में हुई घोषणा के अनुसार, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) और मनिधनेया मक्कल कत्ची (एमएमके) को दो-दो विधानसभा सीटें आवंटित की गई हैं। आईयूएमएल अपने पारंपरिक ‘सीढ़ी’ चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ेगी, जबकि एमएमके के उम्मीदवार डीएमके के ‘राइजिंग सन’ सिंबल पर मैदान में उतरेंगे। यह कदम अल्पसंख्यक मतदाताओं को एक स्पष्ट संदेश देने की कोशिश माना जा रहा है। कांग्रेस के साथ भी बातचीत अब सकारात्मक मोड़ पर पहुंच गई है। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस शुरुआत में 35 सीटों की मांग कर रही थी, लेकिन अब 27 या 28 सीटों और राज्यसभा की एक अतिरिक्त सीट पर समझौता होने की प्रबल संभावना है। तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के. सेल्वपेरुन्थगई ने संकेत दिए हैं कि डीएमके के साथ बातचीत सौहार्द्रपूर्ण रही है और कांग्रेस का गठबंधन अटूट है। पार्टी ने उन अटकलों को भी खारिज कर दिया है जिनमें कहा जा रहा था कि कांग्रेस किसी अन्य दल (जैसे टीवीके) के संपर्क में है। दूसरी तरफ, विपक्षी खेमे यानी एनडीए में फिलहाल अनिश्चितता का माहौल है। ओ. पन्नीरसेल्वम के डीएमके के पाले में जाने की चर्चाओं के बीच एनडीए में अभी तक सीट शेयरिंग को लेकर कोई ठोस फैसला नहीं हो पाया है, जिससे वे फिलहाल दोराहे पर खड़े नजर आ रहे हैं। डीएमके की योजना है कि 9 मार्च को तिरुचिरापल्ली में होने वाले पार्टी के राज्य स्तरीय सम्मेलन से पहले सभी सहयोगियों के साथ सीटों का बंटवारा अंतिम रूप ले ले। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री स्टालिन सोमवार 2 मार्च 2026 को राज्यसभा सीटों और उम्मीदवारों की औपचारिक घोषणा कर सकते हैं। फिलहाल कांग्रेस के तमिलनाडु प्रभारी गिरीश चोडणकर दिल्ली रवाना हो चुके हैं, जहां हाईकमान की मुहर लगते ही इस समझौते का औपचारिक ऐलान कर दिया जाएगा। विदुथलाई चिरुथैगल कत्ची (वीसीके) जैसे अन्य छोटे दलों के साथ भी सोमवार को चर्चा होनी है। एमके स्टालिन की रणनीति साफ है—सहयोगी दलों को उनकी जमीनी ताकत के हिसाब से सीटें देकर गठबंधन को नियंत्रित रखना और चुनाव प्रचार में किसी भी प्रकार की देरी या असमंजस से बचना। अब देखना यह होगा कि बिहार की गलतियों से सबक लेकर बनाया गया यह मजबूत गठबंधन आगामी चुनाव में कितनी सफलता हासिल करता है। वीरेंद्र/ईएमएस/01मार्च2026 ---------------------------------