राष्ट्रीय
01-Mar-2026
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लखनऊ,(ईएमएस)। मिडल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव और आसमान में गूंजते जंगी जहाजों के शोर ने उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के हजारों परिवारों की रातों की नींद उड़ा दी है। ईरान पर अमेरिका और इस्राइली मिसाइलों के हमलों के बाद वहां काम कर रहे लखनऊ और आसपास के जिलों के लोग खौफ के साये में जीने को मजबूर हैं। आंकड़ों के अनुसार, लखनऊ और उसके पड़ोसी क्षेत्रों के लगभग 4000 से ज्यादा लोग वर्तमान में दुबई, अबू धाबी, कुवैत और बहरीन जैसे खाड़ी देशों में नौकरी कर रहे हैं। शनिवार को जैसे ही हमलों की खबर फैली, लखनऊ में रहने वाले उनके परिजनों के फोन बार-बार बजने लगे और हर तरफ से बस एक ही आवाज सुनाई दी सब कुछ छोड़कर फौरन घर वापस आ जाओ। ईरान के तेहरान में रह रहे लखनऊ के दुबग्गा निवासी साहिल ने वहां के मंजर को बयां करते हुए बताया कि आसमान में बरसती आग और मिसाइलों की धधकती रोशनी को देखना बेहद डरावना था। धमाकों की गूंज से पूरा इलाका दहल उठा, लेकिन स्थानीय जनता के साहस ने उन्हें ढांढस बंधाया। वहीं, कुवैत में ड्राइवर के तौर पर काम कर रहे मोहम्मद अम्मार ने बताया कि सहरी के वक्त जोरदार धमाके सुनाई दिए, जिससे पूरा आसमान धुएं और धुंध से भर गया। जानकारी के अनुसार, इन हमलों में नहरा और सालमिया स्थित ठिकानों को निशाना बनाया गया था। बहरीन के मोअरंक में जरदोजी का काम करने वाले अफरोज हैदर ने बताया कि मनामा और जुकेर इलाकों में हुए धमाकों की आवाज उनकी फैक्ट्री तक सुनाई दे रही है, जिससे वहां काम कर रहे करीब 200 लखनऊवासी सहमे हुए हैं। इस वैश्विक तनाव पर लखनऊ के प्रमुख धार्मिक गुरुओं ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। इमाम-ए-जुमा मौलाना सैयद कल्बे जवाद ने इस सैन्य कार्रवाई की निंदा करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए एक बड़ा खतरा बताया है। उन्होंने कहा कि रमजान के इस पाक महीने में इस तरह के हमले मानवता के खिलाफ हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इतिहास गवाह है कि ईरान ने कभी पहले हमला नहीं किया, बल्कि उस पर हमेशा हमले हुए हैं। उन्होंने शांति वार्ता के बीच हुए इस धोखे पर नाराजगी जताते हुए मजलूमों के साथ खड़े होने की अपील की है। फिलहाल, लखनऊ के हजारों परिवार अपने सदस्यों की सुरक्षित वापसी के लिए दुआएं मांग रहे हैं और सरकार की ओर टकटकी लगाए हुए हैं कि कोई ठोस कदम उठाया जाए। एयरपोर्ट पर उड़ानों पर अस्थायी रोक दुबई और दम्माम से भी इसी तरह की चिंताजनक खबरें आ रही हैं। सआदतगंज के मोहम्मद इमरान ने बताया कि दुबई एयरपोर्ट पर उड़ानों पर अस्थायी रोक लगने से तनाव और बढ़ गया है। मार्केट खुले होने के बावजूद लोगों के मन में डर व्याप्त है। ठाकुरगंज और मुफ्तीगंज के परिजनों का कहना है कि उनकी मांएं और बीवियां फोन पर रो-रोकर उनसे वापस लौटने की मिन्नतें कर रही हैं। लखनऊ के लोग वहां ज्यादातर आरी-जरदोजी, टेलरिंग और ड्राइविंग जैसे क्षेत्रों में कार्यरत हैं और इस युद्ध जैसी स्थिति ने उनकी आजीविका और जीवन दोनों पर संकट खड़ा कर दिया है। वीरेंद्र/ईएमएस/01मार्च2026