नई दिल्ली (ईएमएस)। इनसोम्निया यानी अनिद्रा की समस्या को लेकर डॉक्टरों का कहना है कि यह ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति को देर रात तक नींद नहीं आती। कई मरीज रातभर मोबाइल फोन का उपयोग करते रहते हैं, जिससे दिमाग उत्तेजित होता है और नींद और अधिक प्रभावित होती है। विशेषज्ञों के अनुसार, देर रात तक फोन की स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट नींद की प्राकृतिक प्रक्रिया को बाधित करती है और धीरे-धीरे यह आदत एक बीमारी का रूप ले लेती है। चिकित्सकों का मानना है कि इनसोम्निया से बचने के लिए जीवनशैली में सुधार बेहद जरूरी है। समय से भोजन करना, रात में फोन का उपयोग सीमित करना और सोने से पहले दिमाग को शांत रखना बेहद आवश्यक है। डॉक्टरों का कहना है कि देर रात तक अंधेरे कमरे में मोबाइल चलाने से आंखों की रोशनी पर भी असर पड़ सकता है। कई लोग शुरुआत में सिर्फ मनोरंजन या आदत के कारण फोन देखते हैं, लेकिन धीरे-धीरे यह लत नींद को पूरी तरह बाधित कर देती है और गंभीर अनिद्रा में बदल जाती है। विशेषज्ञ बताते हैं कि इनसोम्निया से पीड़ित व्यक्तियों में चिड़चिड़ापन, थकान और मानसिक तनाव बढ़ने लगता है, क्योंकि उन्हें पूरी नींद नहीं मिल पाती। ऐसे मरीजों में आगे चलकर डिप्रेशन या अन्य मानसिक रोग विकसित होने की आशंका भी बढ़ जाती है। इसलिए इस समस्या को नजरअंदाज करने के बजाय समय रहते डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। डॉक्टरों ने बताया कि घर पर ही साधारण उपाय अपनाकर इनसोम्निया से काफी हद तक बचा जा सकता है। रात के भोजन के बाद हल्की वॉक करने, कमरे की लाइट बंद कर शांत वातावरण बनाने और हल्का संगीत सुनने से नींद आने में आसानी होती है। यदि व्यक्ति समय पर सोता है, तो वह सुबह समय से उठ पाएगा और नियमित दिनचर्या अपना सकेगा। सुबह की वॉक या व्यायाम पूरे दिन शरीर को ऊर्जावान बनाए रखने में मदद करता है। डॉक्टरों का कहना है कि सोने से पहले मोबाइल फोन का बिल्कुल उपयोग न करें, क्योंकि स्क्रीन की रोशनी नींद को नुकसान पहुंचाती है। बेहतर दिनचर्या, समय पर नींद और नियमित व्यायाम इस समस्या का सबसे आसान और प्रभावी समाधान है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर ही इनसोम्निया और उससे जुड़ी अन्य बीमारियों से बचा जा सकता है। सुदामा/ईएमएस 02 मार्च 2026