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02-Mar-2026
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नई दिल्ली(ईएमएस)। ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक हवाई यातायात को अस्त-व्यस्त कर दिया है। मध्य पूर्व के हवाई क्षेत्रों में जारी बंदी और सुरक्षा प्रतिबंधों के कारण दिल्ली सहित भारत के विभिन्न शहरों से संचालित होने वाली अंतरराष्ट्रीय उड़ानें बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) और तमाम एयरलाइंस पैसेंजर असिस्टेंस कंट्रोल रूम के माध्यम से स्थिति की निरंतर निगरानी कर रहे हैं। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे हवाई अड्डे के लिए निकलने से पहले अपनी उड़ान का स्टेटस अनिवार्य रूप से जांच लें और संबंधित एयरलाइन के संपर्क में रहें। आंकड़ों के अनुसार, इस संकट का असर उड़ानों के संचालन पर व्यापक रूप से पड़ा है। 28 फरवरी को भारतीय एयरलाइंस द्वारा लगभग 410 उड़ानें रद्द की गईं, जबकि 1 मार्च को कम से कम 350 उड़ानों पर इसका असर पड़ा। 2 मार्च को भी 300 से अधिक उड़ानों के प्रभावित होने की आशंका है। विशेष रूप से यूरोप जाने वाले मुख्य मार्ग जैसे लंदन, ज्यूरिख, फ्रैंकफर्ट, पेरिस, एम्सटर्डम और मिलान बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। कई उड़ानों को वैकल्पिक रास्तों से भेजा जा रहा है, जिससे यात्रा के समय में 2 से 4 घंटे की बढ़ोतरी हो रही है और कुछ विमानों को तकनीकी स्टॉप के लिए रोम जैसे शहरों में उतरना पड़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस की स्थिति भी काफी चिंताजनक है। कतर एयरवेज और एतिहाद ने अपना परिचालन फिलहाल निलंबित रखा है, जबकि एमिरेट्स ने दुबई से अपनी सभी उड़ानें 2 मार्च की दोपहर तक रद्द कर दी हैं। लुफ्थांसा ने मध्य पूर्व के कई गंतव्यों के लिए अपनी सेवाएं 7-8 मार्च तक के लिए रोक दी हैं। ब्रिटिश एयरवेज और वर्जिन अटलांटिक जैसी कंपनियों ने भी रियाद, दुबई और बहरीन के लिए उड़ानों को निलंबित कर दिया है, जिससे भारत से लंदन जाने वाले यात्रियों को देरी या रद्दीकरण का सामना करना पड़ रहा है। ईरान, इराक, कुवैत और यूएई सहित मध्य पूर्व के अधिकांश हवाई क्षेत्र प्रतिबंधित होने के कारण वैश्विक स्तर पर 1600 से अधिक उड़ानें प्रभावित हुई हैं। एयर इंडिया और इंडिगो जैसी भारतीय कंपनियों ने भी खाड़ी देशों के लिए अपनी सेवाएं 2 मार्च की रात तक स्थगित कर दी हैं। वीरेंद्र/ईएमएस/02मार्च2026 ---------------------------------