क्षेत्रीय
03-Mar-2026
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- आसपास क्षेत्र सहित नदी नालों में तेजी से बह रही राख कोरबा (ईएमएस) विद्युत उत्पादन कंपनी के 810 मेगावाट एचटीपीपी से उत्सर्जित राख के लिए ग्राम झाबू-लोतलोता के पास राखड़ बांध बनाया गया है। जिसका तटबंध पुनः टूट गया, तटबंध टूटने से राखड मिश्रित पानी हसदेव नदी सहित आसपास को प्रदूषित कर रहा है। इस बांध में संयंत्र से पानी मिश्रित राख भेजी जाती है। बांध काफी पुराना होने की वजह से भर चुका है, इससे निपटने के लिए प्रबंधन द्वारा कई बार बांध की ऊंचाई भी बढ़ाई जा चुकी है। बताया जा रहा है कि राखड़ बांध भर जाने की वजह से दबाव पड़ने पर उसका तटबंध एकाएक टूट गया। इसके साथ ही पानी मिश्रित राख का सैलाब बाहर निकल पड़ा। धीरे-धीरे तटबंध का काफी चौड़ा हिस्सा बह गया और काफी मात्रा में राख निकल कर आसपास क्षेत्र में फैल गई। इसके साथ ही हसदेव नदी की ओर बहने लगी। स्थानीय लोगों का आरोप लगाते हुए कहना हैं कि नदी में राख मिलने से पानी पूरी तरह प्रदूषित हो जाएगा और सफेद दिखाई देने लगता है। वहीं आसपास फैली राख से ग्रामीणों को काफी काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गर्मी शुरू हो चुकी है, ऐसी स्थिति में तेज धूप की वजह से पानी सूख जाएगा और सूखी राख हवा में उड़ कर ग्रामीणों के घर एवं खाना में जाएगी। राख की वजह से ग्राम झाबू, नवागांव, पुरैनाखार, धनरास, लोतलोता, चारपारा, मड़वामहुआ, ढांडपारा सहित अन्य ग्राम के निवासियों को एक बार फिर मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। उल्लेखनीय हैं की एचटीपीपी के राखड़ बांध टूटने की यह कोई पहली घटना नही है, लगभग दो माह पहले भी राखड़ बांध फूटा था और काफी मात्रा में राखड़ हसदेव नदी में समाहित हुई थी, जो बाद में नहर के माध्यम से किसानों के खेत पहुंच गई थी। यही स्थिति दोबारा निर्मित होने की संभावना बन गई है। सिविल विभाग के कार्यपालन अभियंता नारायण पटेल का कहना है कि राखड़ बांध ओव्हरफ्लो हुआ है। इससे कुछ राख बाहर निकली है। सुधार कार्य शुरू कर दिया गया है, जल्द स्थिति स्थिति सामान्य हो जाएगी। * गिरा भारी वाहन, ठेकेदार ने बांध तोड़कर निकाला बाहर जानकारी के अनुसार राखड़ बांध की ऊंचाई बढ़ाने का काम चल रहा था। इसी दौरान काम में लगा एक भारी वाहन अनियंत्रित होकर सीधे राखड़ बांध में जा गिरा। उस समय बांध में पानी भरा होने के कारण वाहन को बाहर निकालना संभव नहीं हो पा रहा था। ग्रामीणों का आरोप है कि वाहन निकालने के लिए ठेकेदार ने नियमों को दरकिनार करते हुए राखड़ बांध को ही तोड़ दिया। बांध टूटते ही राख मिली पानी की धार बाहर निकल गई, जिससे आसपास के क्षेत्र में राख फैल गई। इसके बाद वाहन को बाहर निकाला गया। घटना के बाद ग्रामीणों ने विरोध जताया। इस पर एचटीपीपी के अधिकारियों ने राख की सफाई कराने का आश्वासन दिया। आंशिक रूप से सफाई भी कराई गई, लेकिन पूरी राख हटाई नहीं जा सकी थी और राखड़ बांध पुनः टूट गया। 03 मार्च / मित्तल