- जिला प्रशासन ने रंगों की नहीं कराई जांच, डॉक्टर हर्बल गुलाल की दे रहे सलाह बिलासपुर (ईएमएस)। होली का पर्व नज़दीक आते ही शहर के बाज़ार रंग-बिरंगे गुलाल और पिचकारियों से सज गए हैं। अनुमान है कि इस बार शहर में 5 करोड़ रुपये से अधिक के रंग-गुलाल की बिक्री हो रही है। मुख्य बाज़ारों से लेकर मोहल्लों तक अस्थायी दुकानों में विभिन्न प्रकार के रंग उपलब्ध हैं। हालांकि इस बार भी केमिकल युक्त रंगों की बिक्री को लेकर चिंता बनी हुई है। त्वचा रोग विशेषज्ञों का कहना है कि सस्ते और चमकीले रंगों में हानिकारक रसायन मिलाए जाते हैं, जो त्वचा, आंखों और बालों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। कई लोगों को एलर्जी, खुजली, जलन और रैशेज जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। खासकर बच्चों और संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को अधिक सावधानी बरतने की ज़रूरत है। डॉक्टरों ने लोगों से अपील की है कि वे हर्बल और प्राकृतिक गुलाल का ही उपयोग करें तथा होली खेलने से पहले त्वचा पर नारियल या सरसों का तेल लगा लें, ताकि रंगों का दुष्प्रभाव कम हो। प्रशासन केमिकल युक्त रंगों पर नहीं कर रही कार्रवाई इधर, जिला प्रशासन की ओर से अब तक बाज़ार में बिक रहे रंगों की गुणवत्ता जांच को लेकर कोई विशेष अभियान नहीं चलाया गया है। खाद्य एवं औषधि विभाग या स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा सैंपल जांच की कार्रवाई नहीं होने से उपभोक्ताओं में चिंता है। नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि केमिकल युक्त रंगों की जांच कर कार्रवाई की जाए, ताकि होली का त्योहार सुरक्षित और खुशहाल माहौल में मनाया जा सके। मनोज राज 03 मार्च 2026