क्षेत्रीय
03-Mar-2026
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बिलासपुर (ईएमएस)। होली के अवसर पर गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय के ग्रामीण प्रौद्योगिकी एवं सामाजिक विकास विभाग के विद्यार्थी प्राकृतिक गुलाल तैयार किया गया। रासायनिक रंगों के बढ़ते उपयोग और उनसे होने वाली गंभीर बीमारियों, यहां तक कि कैंसर के खतरे को देखते हुए विद्यार्थियों ने सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल विकल्प तैयार करने की पहल की है।विद्यार्थी हल्दी, पलाश के फूल, सिंदूर, पालक भाजी, लाल भाजी, चुकंदर, धनिया और मुल्तानी मिट्टी जैसे प्राकृतिक तत्वों से गुलाल बना रहे हैं। इस कार्य का मार्गदर्शन विभाग के डॉ. दिलीप कुमार कर रहे हैं। स्वावलंबी छत्तीसगढ़ योजना से जुड़ी पहल डॉ. दिलीप ने बताया कि यह गतिविधि कौशल विकास प्रकोष्ठ के अंतर्गत संचालित स्वावलंबी छत्तीसगढ़ योजना का हिस्सा है, जिसे विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से शुरू किया गया है।पिछले वर्ष विद्यार्थियों ने 2 क्विंटल गुलाल का उत्पादन किया था, जबकि इस वर्ष 6 क्विंटल गुलाल तैयार किया जा रहा है। इस बार 15 विद्यार्थी इस परियोजना से जुड़े हैं। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष गुलाल की बिक्री से हुई आय से 19 विद्यार्थियों की अध्ययन शुल्क जमा की गई थी। इस वर्ष भी आय से विद्यार्थियों की पढ़ाई का खर्च वहन किया जाएगा। उत्पादन से मार्केटिंग तक सीख रहे हुनर इस कार्यक्रम के तहत विद्यार्थी केवल गुलाल निर्माण ही नहीं, बल्कि मार्केटिंग, विज्ञापन, मूल्य निर्धारण और आकर्षक पैकेजिंग की तकनीक भी सीखने को मिल रहा है।गुलाल को सुगंधित बनाने के लिए मंदिरों में अर्पित गेंदा, मोगरा, गुलाब और चंपा जैसे फूलों का भी उपयोग किया गया है। मनोज राज 03 मार्च 2026