03-Mar-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। दिल्ली के प्रेम नगर की झुग्गियों में बाल विवाह की कड़वी हकीकत सामने आई है। 25 वर्षीय रेशमा की शादी 15 साल की उम्र में हुई थी, जो शिक्षा और अवसरों की कमी को उजागर करता है। 5जी के दौर में भी, गरीबी, दस्तावेज़ों का अभाव और पुरानी सोच के कारण ये बच्चे स्कूल से वंचित हैं, जिससे बाल विवाह का दुष्चक्र जारी है। यह स्मार्ट सिटी की एक अनदेखी विडंबना है। दफ्तर की थकान और दिल्ली के ट्रैफिक से जूझते हुए मैं ऑटो से घर लौट रही थी। प्रेम नगर के पास अचानक नजर बाहर की ओर गई। लोहे की कड़ाहियां, औजार, सिलबट्टे और मटके सजाए कुछ झोपड़ियां। मन में ख्याल आया, चलो आज सिलबट्टा ले ही लेते हैं, मिक्सी के जमाने में हाथ का स्वाद भी चख लेंगे। ऑटो से उतरी तो मंजर कुछ और ही था। दूर तक झोपड़ियों का अंतहीन सिलसिला, जैसे दिल्ली के दिल में एक छोटा सा कस्बा बसा हो। तभी दाईं ओर से आवाज आई, हां मेरी बेटी... क्या लेना है? सामने 50-60 साल की एक अम्मा थीं। चेहरे पर झुर्रियों से ज्यादा वक्त का तजुर्बा था। मैंने पूछा, अम्मा, आप यहां कब से हैं? जवाब मिला, बहुत साल हो गए बेटा, चित्तौड़गढ़ (राजस्थान) से आए थे, तब से यही बर्तन और पत्थर बेचकर गुजारा कर रहे हैं। अम्मा से बात करते हुए मेरी नजर 4-5 झोपड़ी दूर दो युवतियों पर पड़ी। चूल्हे पर हांडी चढ़ी थी और सोंधी सी खुशबू हवा में तैर रही थी। अजीत झा/देवेन्द्र/नई दिल्ली/ईएमएस/03/मार्च/2026