राज्य
03-Mar-2026
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:: पं. मसूरकर और डॉ. निमगांवकर ने जुगलबंदी में बिखेरे शास्त्रीय संगीत के अनूठे रंग :: इंदौर (ईएमएस)। शहर की प्रतिष्ठित संस्था अभिनव कला समाज में होली के पावन अवसर पर शास्त्रीय व उपशास्त्रीय संगीत की एक यादगार शाम सजी। “अभिनव सुरों के संग, होली के रंग” शीर्षक से आयोजित इस सभा में ग्वालियर घराने के पं. सुनील मसूरकर और जयपुर-अतरौली व ग्वालियर घराने की डॉ. पूर्वी निमगांवकर ने अपनी साझा प्रस्तुति से श्रोताओं को रसविभोर कर दिया। कार्यक्रम के प्रथम चरण में दोनों कलाकारों ने राग यमन में मध्यलय तीन ताल की पारंपरिक बंदिश “अरी अली ऐरी आली पिया बिन” से गायन का प्रारंभ किया। शुरुआती आलापी में दोनों घरानों के अलग-अलग चलन का अनूठा सामंजस्य देखने को मिला, जो श्रोताओं को बसंत की सुहानी बयार का अनुभव करा रहा था। कलाकारों की यह जुगलबंदी शास्त्रीय संगीत की गहराई और आपसी तालमेल का बेहतरीन उदाहरण बनकर उभरी। राग यमन के पश्चात कलाकारों ने सकल ब्रजधूम बंदिश की आलापी और मिश्र पीलू में ठुमरी की सुंदरता को स्वर दिए, जिसमें शब्दों के माधुर्य और दोनों के गायन कौशल ने समां बांध दिया। इस पारंपरिक प्रस्तुति को कलाकारों ने अपनी सूझबूझ से बहुत ही सुरुचिपूर्ण ढंग से सजाया। कार्यक्रम के अगले दौर में सुप्रसिद्ध दादरा “रंगी सारी गुलाबी चुनरिया हो” की सुमधुर प्रस्तुति ने उपस्थित संगीत प्रेमियों को सुरों के रंगों में सराबोर कर दिया। समापन की ओर बढ़ते हुए कलाकारों ने भैरवी में दादरा “पिचकारी ना मारो मोरी भींज गयी नई सारी” प्रस्तुत किया, जिसकी साझेदारी की दर्शकों ने करतल ध्वनि से सराहना की। अंत में द्रुत तराने और तबले की जुगलबंदी ने आयोजन को शिखर पर पहुँचाया। संगत पक्ष में तबले पर पं. हितेंद्र दीक्षित ने अत्यंत प्रभावी साथ दिया, जिसमें बोलों की काट और ठुमरी के दौरान बजाई गई लग्गियों ने आयोजन में केसर सी खुशबू बिखेर दी। हारमोनियम पर रवि किल्लेदार ने अपनी उंगलियों का जादू बिखेरा। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों डॉ. भरत शर्मा, राजेश्वरी दीक्षित, अनिल धड़वईवाले और अध्यक्ष प्रवीण खारीवाल द्वारा दीप प्रज्वलन से हुआ। अभिनव संगीत प्रशिक्षण केंद्र के विद्यार्थियों ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। मंच संचालन डॉ. शिल्पा मसूरकर ने किया और आभार प्रधानमंत्री सत्यकाम शास्त्री ने माना। अंत में कलाकारों और श्रोताओं ने फाग गीतों के बीच फूलों और गुलाल से होली खेलकर उत्सव का आनंद लिया। प्रकाश/03 मार्च 2026