अंतर्राष्ट्रीय
05-Mar-2026
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वाशिंगटन (ईएमएस)। आसमान में रात के समय अचानक हरे, बैंगनी, लाल, नीले और गुलाबी रंगों में चमकने वाले लाइट्स को ऑरोरा लाइट्स कहा जाता है। इन रंग बिरंगी लाइट्स को उत्तरी इलाकों में इन्हें नॉर्दर्न लाइट्स या ऑरोरा बोरेलिस और दक्षिणी क्षेत्रों में सदर्न लाइट्स या ऑरोरा ऑस्ट्रेलिस के नाम से जाना जाता है। अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा के अनुसार, ऑरोरा स्पेस वातावरण की सबसे खूबसूरत और वैज्ञानिक रूप से दिलचस्प घटनाओं में से एक है। ऑरोरा तब बनती है जब सूरज से चार्ज्ड पार्टिकल्स प्रोटॉन और इलेक्ट्रॉन का लगातार प्रवाह पृथ्वी की ओर आता है। इन्हें सोलर विंड कहा जाता है। पृथ्वी के पास पहुंचते ही सोलर विंड की टक्कर पृथ्वी की चुंबकीय ढाल यानी मैग्नेटोस्फीयर से होती है। इस टक्कर से ऊर्जा जमा होती रहती है और जब यह ऊर्जा अचानक रिलीज होती है, तो चार्ज्ड कण तेज़ी से पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते हैं। वहां ऑक्सीजन और नाइट्रोजन जैसी गैसों से टकराकर वे इन गैसों को उत्तेजित करते हैं। यही उत्साहित गैसें रंगीन रोशनी छोड़ती हैं, जिसे हम ऑरोरा के रूप में देखते हैं। अब सवाल यह है कि ऑरोरा के रंग अलग-अलग क्यों होते हैं? इसका जवाब है गैस का प्रकार और उसकी ऊंचाई। हरा रंग सबसे आम है और यह 100 से 200 किमी ऊंचाई पर मौजूद ऑक्सीजन से बनता है। लाल रंग 200 किमी से अधिक ऊंचाई पर ऑक्सीजन के उत्तेजित होने से दिखाई देता है। नीला और बैंगनी रंग नाइट्रोजन गैस से आता है, खासकर 100–200 किमी की ऊंचाई पर। वहीं गुलाबी या लाल-बैंगनी चमक तब बनती है जब नाइट्रोजन 100 किमी से नीचे की ऊंचाई पर एक्साइट होती है। कभी-कभी ये रंग आपस में मिलकर सफेद, बैंगनी या गुलाबी आभा भी पैदा कर देते हैं। जब सूरज अत्यधिक सक्रिय होता है जैसे सोलर फ्लेयर्स या बड़े विस्फोट तब जियोमैग्नेटिक स्टॉर्म यानी चुंबकीय तूफान बनते हैं। इन तूफानों में अतिरिक्त ऊर्जा पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करती है, जिससे ऑरोरा बहुत दूर-दराज के इलाकों में भी दिखने लगती है। सुदामा/ईएमएस 05 मार्च 2026 Photo---------0C मौत को मात देकर लौटी महिला ने साझा किया रोंगटे खड़े कर देने वाले अनुभव लंदन (ईएमएस)। सोशल मीडिया पर इन दिनों एक ऐसी कहानी वायरल हो रही है, जिसे पढ़कर विज्ञान और अध्यात्म के बीच की बहस फिर तेज हो गई है। ब्रिटेन के ग्लौस्टर की रहने वाली 41 वर्षीय विक्टोरिया थॉमस ने दावा किया है कि उन्होंने मौत के बाद की दुनिया देखी और वहां से वापस लौटी हैं। यह घटना तब की है जब विक्टोरिया 35 वर्ष की थीं और जिम में एक वर्कआउट क्लास के दौरान अचानक फर्श पर गिर पड़ी थीं। उस वक्त उन्हें कार्डियक अरेस्ट आया था और उनका दिल धड़कना बंद हो गया था। पैरामेडिक्स ने उन्हें बचाने के लिए 17 मिनट तक सीपीआर दिया, लेकिन कोई पल्स नहीं मिली। चिकित्सकीय रूप से उन्हें मृत घोषित किया जा चुका था, पर तभी एक चमत्कार हुआ और उनकी धड़कनें वापस लौट आईं। विक्टोरिया ने उन 17 मिनटों के अपने अनुभव को साझा करते हुए बताया कि वह पल बेहद डरावना और अजीब था। उन्होंने बताया कि अचानक सब कुछ काला पड़ गया था और उन्हें अहसास हुआ कि वह जिम की छत के पास तैर रही हैं। वह ऊपर से नीचे पड़े अपने ही शरीर को देख पा रही थीं। उन्होंने फर्श पर खुद को पड़ा हुआ, चारों तरफ लोगों की भीड़ और पीली मशीनों को स्पष्ट रूप से देखा। आमतौर पर नियर डेथ एक्सपीरियंस में लोग सफेद रोशनी या सुकून की बात करते हैं, लेकिन विक्टोरिया के लिए यह अनुभव बिल्कुल अलग था। उनके अनुसार, वहां कोई रोशनी या शांति नहीं थी, बस एक शून्य था जिससे वह अपने भौतिक शरीर को देख रही थीं। बाद में डॉक्टर्स ने जांच में पाया कि विक्टोरिया डैनन डिजीज नामक एक अत्यंत दुर्लभ जेनेटिक डिसऑर्डर से पीड़ित थीं। यह बीमारी इतनी दुर्लभ है कि दुनिया में 10 लाख लोगों में से किसी एक को होती है, जो सीधे दिल, मांसपेशियों और लिवर पर हमला करती है। इसी बीमारी के कारण उनका दिल बार-बार फेल हो रहा था। कई बार की जद्दोजहद और हार्ट ट्रांसप्लांट के सफल ऑपरेशन के बाद अब विक्टोरिया पूरी तरह स्वस्थ हैं। वह अब एक बेटे की मां हैं और अपनी फिटनेस की दुनिया में दोबारा वापसी कर चुकी हैं। उनकी यह कहानी न केवल चिकित्सा जगत के लिए एक केस स्टडी है, बल्कि जीवन और मृत्यु के रहस्यों को लेकर नई जिज्ञासा पैदा करती है। वीरेंद्र/ईएमएस 05 मार्च 2026