अंतर्राष्ट्रीय
05-Mar-2026
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तेहरान (ईएमएस)। मिडिल ईस्ट में तनाव अपनी चरम सीमा को पार कर गया है, जहां अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए एक संयुक्त हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर ने पूरे क्षेत्र को युद्ध की आग में झोंक दिया है। इस घटना के बाद ईरान ने भी भीषण पलटवार किया है, जिससे अरब जगत और पूरे मध्य पूर्व में हाहाकार मच गया है। ईरान ने न केवल इजरायली शहरों को निशाना बनाया है, बल्कि सऊदी अरब, ओमान, यूएई और बहरीन जैसे देशों पर भी मिसाइल और ड्रोन की बरसात कर दी है। विशेष रूप से मध्य पूर्व में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया जा रहा है, जिससे वैश्विक स्तर पर बड़े संकट की स्थिति पैदा हो गई है। ईरान ने इस युद्ध में अपनी सबसे घातक सैन्य शक्ति का प्रदर्शन किया है। तेहरान के पास हजारों की संख्या में ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलें हैं, जिनमें सबसे प्रमुख खोर्रमशहर-4 है, जिसे खैबर के नाम से भी जाना जाता है। यह चौथी पीढ़ी की बैलिस्टिक मिसाइल अपनी मारक क्षमता और रफ्तार के मामले में बेहद खतरनाक मानी जा रही है। तकनीकी विश्लेषण के अनुसार, खोर्रमशहर-4 की अधिकतम गति 20,000 किलोमीटर प्रति घंटा (मैक 16) तक पहुंच सकती है, जो इसे दुनिया की कई उन्नत मिसाइलों, यहाँ तक कि ब्रह्मोस जैसी क्रूज मिसाइलों से भी अधिक तेज बनाती है। जहाँ ब्रह्मोस की रेंज लगभग 290 से 500 किलोमीटर है, वहीं खोर्रमशहर-4 की मारक क्षमता 2,000 किलोमीटर तक है। यह 1,500 किलोग्राम का भारी वारहेड ले जाने में सक्षम है, जबकि ब्रह्मोस की क्षमता 200 से 300 किलोग्राम तक सीमित है। बढ़ते तनाव को देखते हुए अमेरिका ने अपनी रणनीतिक बढ़त बनाने के लिए परमाणु ऊर्जा से संचालित विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन के नेतृत्व में एक विशाल कैरियर स्ट्राइक ग्रुप को क्षेत्र में तैनात कर दिया है। इस स्ट्राइक ग्रुप में गाइडेड मिसाइल डेस्ट्रॉयर और उन्नत वायु रक्षा प्रणालियाँ शामिल हैं। यह विमानवाहक पोत अपनी परमाणु शक्ति के कारण बिना ईंधन भरे लंबे समय तक सक्रिय रह सकता है और अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों व हेलीकॉप्टरों से लैस है। जवाब में ईरान ने भी अपनी मिसाइलों को भूमिगत सुरक्षित ठिकानों से तैनात कर दिया है। खोर्रमशहर-4 की हाइपरसोनिक गति और सटीकता दुश्मन की रक्षा प्रणालियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। फिलहाल पूरा क्षेत्र बारूद के ढेर पर बैठा है और दुनिया एक बड़े विनाशकारी युद्ध की गवाह बन रही है। वीरेंद्र/ईएमएस 05 मार्च 2026