वाशिंगटन (ईएमएस)। लोगों का मानना हैं कि उनकी लंबाई स्थायी होती है, लेकिन विज्ञान बताता है कि ग्रैविटी के कारण इंसान की ऊंचाई दिनभर में लगभग 1–2 सेंटीमीटर तक घट-बढ़ सकती है। वैज्ञानिकों की माने तो सुबह उठते ही हम सबसे लंबे होते हैं क्योंकि रात भर लेटने से रीढ़ की हड्डी पर दबाव कम हो जाता है और स्पाइनल डिस्क्स फैलने लगती हैं। लेकिन अंतरिक्ष में यह बदलाव इससे कई गुना ज्यादा चौंकाने वाला होता है। अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा के अनुसार, माइक्रोग्रैविटी यानी लगभग वजनहीन माहौल में एस्ट्रोनॉट्स की हाइट औसतन 3 प्रतिशत तक बढ़ जाती है, वह भी सिर्फ शुरुआती 3–4 दिनों में। इसका मुख्य कारण है कि स्पेस में रीढ़ की डिस्क्स पर धरती जैसी ग्रैविटी का दबाव नहीं होता और वे स्वतंत्र रूप से फैल जाती हैं। धरती पर ग्रैविटी लगातार स्पाइनल कॉलम को संकुचित करती रहती है, जिससे हमारी लंबाई स्थिर बनी रहती है। लेकिन स्पेस में दबाव पूरी तरह खत्म हो जाता है। इसी वजह से न केवल हाइट बढ़ती है, बल्कि शरीर की मुद्रा, बैठने का तरीका और कंधों की स्थिति तक बदल जाती है। नासा ने उदाहरण देते हुए बताया कि एस्ट्रोनॉट केट रूबिन्स की ‘अर्थ हाइट’ 171 सेंटीमीटर थी, जो अंतरिक्ष में बढ़कर 174.4 सेंटीमीटर हो गई। यानी उन्हें लगभग 3.4 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी मिली। हालांकि धरती पर लौटते ही ग्रैविटी के प्रभाव से उनकी हाइट फिर से सामान्य हो गई। नासा के ह्यूमन रिसर्च प्रोग्राम में एस्ट्रोनॉट माइक बैरेट और प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर सुधाकर राजुलु ने बताया कि माइक्रोग्रैविटी शरीर को कई तरह से प्रभावित करती है। इसे समझाने के लिए नासा ने ‘व्हाट्स योर स्पेस हाइट?’ नाम की एक रोचक एक्टिविटी भी शुरू की थी। इसमें स्कूली बच्चे सुबह-सुबह अपनी हाइट, पैर की लंबाई और आर्म स्पैन मापते हैं, ताकि वे समझ सकें कि ग्रैविटी हमारे शरीर को कैसे प्रभावित करती है। यह पूरा अध्ययन एंथ्रोपोमेट्री यानी शरीर मापन विज्ञान से जुड़ा है। नासा में एंथ्रोपोमेट्रिस्ट्स की एक विशेषज्ञ टीम होती है, जो एस्ट्रोनॉट्स के शरीर के माप लेकर स्पेस सूट, सीट साइज़, हैच ओपनिंग और इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन के विभिन्न हिस्सों का डिजाइन तैयार करती है। क्योंकि स्पेस में हाइट बढ़ने से कंधे ऊपर उठ जाते हैं, हाथ फर्श से दूर हो जाते हैं और शरीर का संतुलन बदल जाता है, इसलिए स्पेसक्राफ्ट के कई उपकरण और संरचनाएं एडजस्टेबल बनाई जाती हैं। अंतरिक्ष में काम करते समय एस्ट्रोनॉट्स को खुद को स्थिर रखने के लिए पैरों को फर्श के फुट-स्टैंड में फंसाना पड़ता है, क्योंकि वहां ग्रैविटी नहीं होती। नासा के मुताबिक, लॉन्च से पहले और धरती पर लौटने के बाद एस्ट्रोनॉट्स की हाइट अलग होती है, इसलिए मिशन डिजाइन में इन बदलावों को ध्यान में रखना बेहद जरूरी है। सुदामा/ईएमएस 05 मार्च 2026