होली के रंगों और गुलाल से सराबोर रहा शहर जबलपुर, (ईएमएस)। बुराई पर अच्छाई का प्रतीक रंगों का अलमस्त त्यौहार होलिकोत्सव परम्परागत तरीके से मनाया गया। लोग रंगों में सराबोर रहे, अपने-अपने में मस्त रहे। शराब पीकर हुड़दंग मचाने वालों पर पुलिस ने वो लगाम कसी कि हुड़दंग तो हुई लेकिन शालीन। शहर के प्रमुख चौराहों पर पुलिस ने स्टापेज लगा रखे थे, जिससे शराबियों के वाहनों की रफ्तार और अलमस्ती दोनों नियंत्रित रही। इस साल चंद्रग्रहण होने की वजह से होलिका दहन के तीसरे दिन रंगों का पर्व धुरेडी मनाया गया, ग्रहण वाले दिन सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा| बुधवार को सुबह से ही रंग और अबीर उड़ने लगा। हुरियारे रंगों में डूबने लगे। सुबह से शाम तक शहर में रंग गुलाल होता रहा। कालोनियों में होली का माहौल ही कुछ अलग था। लोग टोलियां बनाकर एक-दूसरे को रंग गुलाल लगा रहे थे। जबकि हुड़दंगियों को अपना अंदाज ही अलग था। कोई काला, कोई पीला, कोई नीले रंग में लिपटा झूम रहा था। डीजे साउण्ड सिस्टम पर सख्ती से पाबंदी के बाद भी देर रात तक कहीं-कहीं नाच गाना होता रहा। जबकि दूसरे दिन लाउड स्पीकर पूरी तरह बंद रहे, लेकिन साउण्ड बॉक्स और ढोल ढमाकों के साथ खासकर नवयुवकों की टोलियां हुड़दंग मचाती रही। ये बात अच्छी रही कि लोग आपस में ही होली खेलते रहे। किसी अपरिचित व्यक्ति पर न रंग डाला, न गुलाल फेंकी। इसलिए भी लड़ाई झगड़े की वारदातें कम हुईं। पुरानी रंजिशों को लेकर भी कुछ छुटपुट वारदातें जरूर हुईं। मस्तों की टोलियां निकलीं............ बुधवार को सुबह से ही युवाओं की टोलियां नगाढ़ियों की थाप पर झूमती हुईं निकली और गुलाल उड़ते हुए अपने क्षेत्रों में भ्रमण कर बुजुर्गों का आर्शीवाद और युवाओं को परस्पर बधाईयां देने का यह क्रम दोपहर तक चलता रहा। बच्चों की पिचकारियां............. बच्चों की अठखेलियां निराला समा बांध रही थीं। पिचाकारियों में भरे रंगों की बौछारें अधिकांशतः उन्हीं के बीच चली। यदाकदा उनकी पिचकारियों की दिशा भटकी जरूर, लेकिन उनकी मासूम बौछारों में लोग घुल मिल गये, हंसते हुये बच्चों को प्यार करते अपने रास्ते निकल गये। गांवों का निरालापन...... गांवों में होली की अलग ही मस्ती रही। देर रात तक फागों के स्वर गूंजते रहे। नगढ़ियों की दिलकश लहरियां युवाओं को थिरकने मजबूर करती रहीं। यहां का पर्वीय परिवेश स्नेह की फुहारों और गुलाल में रंगा नजर आया। आत्मीयता की झलक...... शहरों का माहौल रहा हो अथवा गांवों का, सभी जगह भाईचारे की बयार बही। ऐसी कोई घटना नहीं हुई, जिससे स्नेह का दामन बदरंग हो पाता। सांस्कृतिक आयोजनों की कमी खली.... कभी होली में सांस्कृतिक आयोजनों की भरमार रहा करती थी। लेकिन इस वर्ष होली में सांस्कृतिक आयोजनों की कमी जमकर खली। ले-देकर गुंजन कला सदन द्वारा होलिका दहन की पूर्व संध्या पर रासरंग महोत्सव शहीद स्मारक में आयोजित किया गया, जो होलिका दहन के दिन एकमात्र सांस्कृतिक आयोजन रहा। मंहगाई और परीक्षाओं पर असर.... होली के त्यौहार में इस बार बेतहाशा मंहगाई और परीक्षाओं का प्रभाव भी स्पष्ट दिखा। बेरोजगार नौजवान जरूर होली की हुड़दंग में शामिल रहे, जबकि समस्याओं से बेजार नागरिक किसी तरह त्यौहार मनाने की औपचारिकता पूरी करने में ही परेशान रहा। स्कूल स्तर से लेकर कॉलेज स्तर तक की परीक्षाओं का दौर चलने के कारण विद्यार्थी वर्ग उत्साह से रंगों का यह पर्व मनाने की बजाय अध्ययन-अध्यापन में जुटा रहा। भाईदूज का पर्व मनाया......... इस साल भाईदूज का पर्व तिथि के मुताबिक धुरेड़ी के दूसरे दिन गुरुवार 5 मार्च को परम्परागत उत्साह के साथ मनाया गया। बहनें भाईयों के माथे पर टीका लगा उनकी दीर्घायु होने की कामना करेंगी। सेंट्रल जेल में भाईदूज के पर्व पर कैदी भाईयों को तिलक लगाने पहुंची बहनों के लिये विशेष इंतजाम किये गये है. उन्हें इस बार तंबू की जगह मुलाकात खिड़की से टीका लगाने की सुविधा उपलब्ध कराई गई. सुनील साहू / मोनिका / 05 मार्च 2026/ 05.40