राज्य
05-Mar-2026
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:: नदी उद्गमों का विकास और अतिक्रमण पर होगी सख्त कार्रवाई; भोपाल में जुटेगा अंतर्राष्ट्रीय जल सम्मेलन :: भोपाल/इंदौर (ईएमएस)। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जल गंगा संवर्धन अभियान केवल एक पर्यावरणीय कार्यक्रम नहीं, बल्कि हमारी भावी पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित करने का एक महायज्ञ है। गुरुवार को मंत्रालय में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि अभियान को ग्राम स्तर तक ले जाया जाए और इसमें जन-भागीदारी को प्राथमिकता दी जाए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट चेतावनी दी कि जल संरचनाओं के जलग्रहण क्षेत्रों पर किसी भी तरह का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और ऐसे तत्वों के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्यवाही की जाएगी। मंत्रालय भोपाल में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा, अशोक बर्णवाल, संजय दुबे, नीरज मंडलोई, दीपाली रस्तोगी, शिवशेखर शुक्ला एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इंदौर संभागायुक्त कार्यालय से संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े, उपायुक्त (राजस्व) सपना लोवंशी एवं उपायुक्त (विकास) पुरुषोत्तम पाटीदार शामिल हुए। :: 19 मार्च से प्रदेशव्यापी अभियान का आगाज :: बैठक में मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य स्तरीय अभियान वर्ष प्रतिपदा (19 मार्च) से एक साथ शुरू होगा। इस दौरान नदियों के उद्गम स्थलों को व्यवस्थित रूप से विकसित करने और उनके आसपास सघन पौधरोपण की योजना है। डॉ. यादव ने प्लास्टिक की बोतलों के उपयोग को हतोत्साहित करने और सार्वजनिक स्थलों पर प्याऊ परंपरा को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्वच्छ शीतल पेयजल उपलब्ध कराना हमारा सामाजिक दायित्व होना चाहिए। :: अभियान के मुख्य पड़ाव और आयोजन :: अंतर्राष्ट्रीय जल सम्मेलन : 23-24 मई को भोपाल में जल विशेषज्ञों का समागम। क्षिप्रा परिक्रमा : 25-26 मई को शिप्रा नदी की परिक्रमा यात्रा। गंगा दशहरा (26 मई) : उज्जैन में शिप्रा तट पर महादेव नदी कथा का आयोजन। सदानीरा समागम : 30 मई से 7 जून तक भारत भवन (भोपाल) में विशेष कार्यक्रम, जहाँ कृषि भूमि की सैटेलाइट मैपिंग का लोकार्पण होगा। :: विभागों को सौंपे गए बड़े लक्ष्य :: मुख्यमंत्री ने जिला कलेक्टरों को नोडल अधिकारी के रूप में मॉनिटरिंग के निर्देश दिए हैं। विभिन्न विभागों के लिए निर्धारित लक्ष्य इस प्रकार हैं: 1. पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग : 170 करोड़ रुपये की लागत से 2200 जल संवर्धन कार्य किए जाएंगे। साथ ही 86 हजार से अधिक खेत-तालाबों और 553 अमृत सरोवरों का निर्माण पूर्ण किया जाएगा। 2. नगरीय विकास विभाग : प्रदेश के नगरीय निकायों में 120 जल संरचनाओं का पुनरुद्धार और 4,130 रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने का लक्ष्य है। नदियों में मिलने वाले 20 बड़े नालों के शोधन (Treatment) की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी। 3. वन एवं पर्यावरण विभाग : नर्मदा संरक्षण के अंतर्गत 28 लाख पौधों का रोपण किया जाएगा। वन्य जीवों के लिए 25 करोड़ रुपये की लागत से 400 जल संरचनाएं और 189 तालाबों का गहरीकरण होगा। 4. महिला एवं बाल विकास विभाग : आंगनवाड़ी केंद्रों को जल एवं पोषण मॉडल के रूप में विकसित किया जाएगा। हर केंद्र में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग के लिए 16 हजार रुपये स्वीकृत किए गए हैं। :: नवाचारों का होगा आदान-प्रदान :: मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन जिलों ने जल संरक्षण में बेहतर कार्य किए हैं, वे अपने मॉडल अन्य जिलों के साथ साझा करें। बेतवा, क्षिप्रा और गंभीर नदियों के पुनर्जीवन के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार की जाएगी। बैठक में इंदौर से संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े और कलेक्टर शिवम वर्मा, नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल, जिला पंचायत सीईओ सिद्धार्थ जैन सहित संबंधित विभागों के अधिकारी वर्चुअली शामिल हुए। प्रकाश/5 मार्च 2026