जबलपुर, (ईएमएस)। भगवान श्रीराम की मर्यादा और श्रीकृष्ण की कर्म शीलता के समवेत स्वरूप का भाव छत्रपति शिवाजी महाराज में है। सामाजिक समरसता का भाव शिवाजी महाराज की शासन व्यवस्था में था। हर जाति वर्ग और भाषा-भाषी को जोड़कर निरंतर मराठा मावलों की सेना को सनातन संस्कृति के विरोधियों को परास्त किया। वर्तमान समय में सनातनी संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता और सनातन संस्कारों को जन जन तक पहुंचाने के लिए सनातनी लोगों को समर्पित भाव से कार्य करने की आवश्यकता है उक्त उद्गार वक्ताओं ने महाराष्ट्र समाज जबलपुर के तत्वावधान में हिंदवी स्वराज्य के संस्थापक, मातृभूमि के सच्चे सपूत छत्रपति शिवाजी महाराज की तिथि अनुसार 396 जयंती फाल्गुन कृष्ण तृतीया के अवसर पर प्रतिमा स्थल मदन महल थाने के बाजू में प्रातः कालीन अभिषेक पूजन माल्यार्पण, पुष्पांजलि भावाजांलि अर्पित कर कहें। पूजन अर्चन आरती गुरूजी पं स्वापनिल गरे, पं निर्णय काले ने संपन्न कराया। इस अवसर पर डा जितेन्द्र जामदार, पूर्व महापौर एवं समाज के कार्याध्यक्ष सदानंद गोडबोले, पूर्व महापौर डॉ स्वाति सदानंद गोडबोले, अभय गोरे, राजेन्द्र बर्बे,वसंत चेलानी,मंजू देशमुख, डॉ नुपुर देशकर, विध्येश भापकर, प्रशांत धुमाल, आदित्य गुप्ता, निखिल देशकर, प्रकाश पवार, मनोज कुशवाहा, राजू कोतवाल, मनोज चौधरी, राजा हिरसकर, किशोर कलमकर, महेश रोहरा, जितेन्द्र श्रीवास्तव, राजेन्द्र तिवारी सहित बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता बंधुओं की उपस्थिति रही है। सुनील साहू / मोनिका / 06 मार्च 2026/ 02.00