- न्यायिक हिरासत में आत्म हत्या भोपाल (ईएमएस)। पिछले 6 साल में मध्य प्रदेश की जेलों में 45. 31 फ़ीसदी कैदियों ने फांसी लगाकर आत्महत्या की है। यह जानकारी विधानसभा में सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई है। पुरुष कैदियों ने फांसी लगाने के लिए जूते की लेस से लेकर चादर और कपड़ों का उपयोग किया है। वहीं महिला कैदियों ने फांसी लगाने के लिए साड़ी और शौचालय का सबसे ज्यादा उपयोग किया है। जेल में बंद कैदी न्यायिक हिरासत में होते हैं। जेल के अंदर इतने बड़े पैमाने पर कैदियों की आत्महत्या न्यायिक व्यवस्था पर भी प्रश्न चिन्ह खड़ा करता है। मध्य प्रदेश की जेलों में विचाराधीन कैदियों की संख्या जेल की कुल केदी क्षमता से लगभग 36 फ़ीसदी ज़्यादा है। विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार इस समय मध्य प्रदेश की जेलों में 42147 कैदी हैं। इनमें से लगभग 52 फ़ीसदी कैदी अंडर ट्रायल हैं। मध्य प्रदेश की उप जेल लखनादौन, जिला जेल धार, केंद्रीय जेल ग्वालियर, केंद्रीय जेल रीवा, जिला जेल कटनी, जिला जेल छतरपुर, सर्किल जेल शिवपुरी तथा केंद्रीय जेल सागर सतना और इंदौर की जेल में क्षमता से अधिक कैदी बंद करके रखे गए हैं। यह स्थिति तब है, जब सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट कई बार निर्देश दे चुके हैं। अंडर ट्रायल कैदियों के बारे में हर महीने समीक्षा की जाए। इसके बाद भी स्थिति दिन प्रतिदिन बद से बदतर होती चली जा रही है। सबसे बड़ी बात यह है, जेल में जो भी कैदी हैं,वह सब न्यायिक हिरासत में होते हैं। इसमें न्यायपालिका की जिम्मेदारी सबसे ज्यादा है। एसजे/ 6 मार्च /2026