राष्ट्रीय
07-Mar-2026


ना डेटा ना वॉइस सर्विस टेलीकॉम कंपनियों की लूट, उपभोक्ताओं की सुनवाई नहीं नईदिल्ली (ईएमएस)। केंद्र सरकार और टेलिकॉम कंपनियां स्पीड को लेकर बड़े-बड़े दावे करती हैं। जिस तकनीकी का दावा किया जाता है। हकीकत में उससे आधी भी उपभोक्ताओं को नहीं मिल पाती है। स्मार्टफोन और मोबाइल फोन आम जीवन का अहम हिस्सा बन गया है। इसके माध्यम से सभी सर्विसेज उपभोक्ताओं तक पहुंच रही हैं। इसके बाद भी फोन पर हर जगह सिग्नल मिलते नही हैं। ना ही आवाज ठीक होती है। नाही डेटा स्पीड से उपभोक्ताओं को मिल पाता है। हाल ही में जो सर्वे किया गये हैं। उसमें टेलीकॉम कंपनियों की सेवाओं को सबसे ज्यादा असंतोष जनक पाया गया है। दूरसंचार नियामक आयोग की पिछले 1 वर्ष की 13 रिपोर्ट का अध्ययन करने पर पाया गया है। आठ राज्यों के 13 शहरों में लगभग 3200 किलोमीटर मैं सर्वे किया गया। हाईवे पर एयरटेल जिओ बीएसएनल इत्यादि टेलीकॉम कंपनियों की सेवाओं की जांच की गई। कहीं पर भी दावे के अनुसार गुणवत्ता सर्वे टीम को नहीं मिली। दूरसंचार नियामक आयोग ने एक साल में 10 टेस्ट ड्राइव रिपोर्ट में जांच की है। कंपनियों द्वारा 100 एमबीपीएस के नेटवर्क का दावा किया जाता है। हकीकत में 50 एमबीपीएस प्रति मिनट से ज्यादा की स्पीड कहीं पर भी नहीं मिली। टेलीकॉम कंपनियों द्वारा इंटरनेट के माध्यम से वॉइस सर्विस उपलब्ध कराई जा रही है। जिसके कारण वॉइस और डेटा की क्वालिटी और भी खराब हो गई है। अब तो मोबाइल फोन पर ठीक से बात भी नहीं हो पा रही है। इतनी सारी रिपोर्ट होने के बाद भी दूरसंचार नियामक आयोग टेलीकॉम कंपनियों पर ठोस कार्रवाई करने से बचता है। इसका खामियाजा उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ता है। वीडियो स्ट्रीमिंग भगवान भरोसे? रिपोर्ट में बस अड्डे, स्टेशन, अस्पतालों तथा सार्वजनिक स्थलों की जांच की गई। भीड़भाड़ वाले स्थान में सबसे घटिया क्वालिटी की सेवाएं प्राप्त हुई हैं। भीड़भाड़ वाले इलाके में सबसे खराब सिग्नल जांच के दौरान पाए गए हैं। मध्य प्रदेश के पन्ना-छतरपुर, पंजाब के पटियाला, आंध्र प्रदेश के श्री काकुलम,कर्नाटक के बीदर,राजस्थान के जयपुर-टोंक, महाराष्ट्र के जलगांव, छत्तीसगढ़ के बिलासपुर,गुजरात के सूरत, मध्य प्रदेश के भोपाल, पंजाब मे हाईवे इंटरसिटी कॉरिडोर में जांच की गई। इस सर्वे में स्पष्ट रूप से यह देखने को मिला है। भीड़भाड़ वाले इलाके में सेवाएं सबसे ज्यादा खराब हैं। बड़े और छोटे शहरों में शहर के अंदर सिग्नल नहीं मिलते हैं। घरों के अंदर तो हर जगह सिग्नल्स की शिकायत देखने को मिली। जिसके कारण मोबाइल फोन पर बात करना भी मुश्किल होता है। बात करने के लिए उसे स्थान पर जाना पड़ता है जहां सिग्नल मिल जाएं। टेलीकॉम कंपनियां अपने ग्राहकों की संख्या को लगातार बढाती जाती हैं। उसके हिसाब से अपने नेटवर्क को विकसित नहीं करती हैं। जिसके कारण धूप और छांव की तरह टेलीकॉम कंपनियों के सिग्नल्स आते- जाते रहते हैं। स्पीड भी घटती-बढ़ती रहती है। कभी-कभी तो 10 से 20 एमबीपीएस की स्पीड भी उपभोक्ताओं को नहीं मिल पाती है। हॉटस्पॉट के क्षेत्र? टेलीकॉम कंपनियों द्वारा हॉटस्पॉट की सेवाएं उपलब्ध कराने का बड़ा दावा किया जाता है। जांच में 13 शहरों की जांच में एक भी शहर ऐसा नहीं मिला। जहां पर 4K की स्ट्रीमिंग उपलब्ध हो। टेलीकॉम कंपनियों की मनमानी को रोकने मे केंद्र सरकार का टेलीकॉम मंत्रालय तथा टेलीकॉम नियामक आयोग एक तरह से बेबस नजर आता है। सभी को मालूम है, टेलीकॉम कंपनियां जो वायदे करती हैं। वह केवल कागजों पर रहते हैं। दावों के नाम पर शुल्क बढ़ा दिए जाते हैं। हकीकत में उपभोक्ताओं से जजिया कर की तरह वसूली शुरू हो जाती है। सेवाएं पहले से भी ज्यादा घटिया मिलती हैं। उपभोक्ताओं को कहीं से भी न्याय नहीं मिलता है। यही वर्तमान का सच है। एसजे/ 7 मार्च /2026