07-Mar-2026
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- शाजापुर की चंद्रिका मितौला ने मल्लखंब में पदकों की झड़ी लगाकर रचा इतिहास शाजापुर (ईएमएस)। जब नियति ने पैरों की शक्ति छीनने का प्रयास किया, तो अपने अदम्य साहस से शाजापुर की होनहार बेटी ने आकाश नाप लिया! घुटने के स्नायुबंध (लिगामेंट) टूटने और पैरों की दो बड़ी व जटिल शल्य-चिकित्साओं (ऑपरेशन) की असहनीय पीड़ा के उपरांत भी, शाजापुर की चंद्रिका मितौला ने पराजय स्वीकार करना नहीं सीखा। द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित प्रशिक्षक (कोच) योगेश मालवीय के मार्गदर्शन में 21 वर्षीय मल्लखंब खिलाड़ी ने न केवल पीड़ा को परास्त कर क्रीड़ांगन (मैदान) में ओजस्वी वापसी की, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर एक के बाद एक पदक जीतकर संपूर्ण राष्ट्र में नारी शक्ति और जीवटता का एक अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया है। शाजापुर शहर के राकेश मितौला, रीता मितौला की बेटी चंद्रिका ने मात्र 13 वर्ष की आयु में मल्लखंब जैसे शरीर की परीक्षा लेने वाले अत्यंत कठिन स्वदेशी खेल को अपना लिया था। प्रशिक्षक योगेश मालवीय की पारखी दृष्टि और चंद्रिका के दिन-रात के अथक परिश्रम ने शीघ्र ही परिणाम देना आरंभ कर दिया और जिले का नाम राष्ट्रीय पटल पर स्वर्णाक्षरों में अंकित हो गया। आघात, पीड़ा और एक विजेता का पुनरागमन चंद्रिका की सफलता का यह मार्ग जरा भी सुगम नहीं रहा। राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता के मध्य उनके घुटने का लिगामेंट बुरी तरह टूट गया था। परिस्थिति इतनी गंभीर थी कि उन्हें पैरों की दो बड़ी शल्य-चिकित्साओं से गुजरना पड़ा। किसी भी सामान्य खिलाड़ी के लिए यह उसके खेल जीवन के अंत जैसा बुरा सपना था, परंतु पीड़ा और संकटों के उस भयंकर काल में भी चंद्रिका का उत्साह क्षीण नहीं हुआ। उन्होंने पराजय स्वीकार करने के स्थान पर शीघ्र स्वास्थ्य लाभ प्राप्त किया और खेल मैदान में लौटकर पदक जीतकर यह सिद्ध कर दिया कि वास्तविक शक्ति शरीर में नहीं, बल्कि फौलादी संकल्पों में होती है। स्वर्णिम खेल यात्रा और प्रमुख उपलब्धियां चंद्रिका ने अपनी खेल यात्रा में कई विशाल मंचों पर पदकों का अंबार लगाया है। वर्ष 2018 एम.एफ.आई. मल्लखंब प्रतियोगिता, चेन्नई में आयोजित की गई जिसमें चंद्रिका ने 2 स्वर्ण और 1 रजत पदक जीता। इसी वर्ष में ही एक भारत श्रेष्ठ भारत, मथुरा में हुए आयोजन में 1 स्वर्ण, 2 रजत पदक हासिल किए। कामयाबी का यह सिलसिला यहीं नही रूका। चंद्रिका ने अपने हौंसलों को पंख देकर उड़ान भरते हुए गोवा में एम.एफ.आई. राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता में शामिल होकर 1 स्वर्ण , 1 रजत और 1 कांस्य पदक को जीत लिया। इसके बाद 2019 (राष्ट्रीय दल स्पर्धा, तमिलनाडु) में कांस्य पदक, 2021 (खेलो इंडिया, हरियाणा) में स्वर्ण पदक, 2022 36वें राष्ट्रीय खेल, गोवा में रजत पदक, 2023 खेलो इंडिया, तमिलनाडु 1 स्वर्ण और 1 रजत पदक, 2024 अखिल भारतीय विश्वविद्यालय स्पर्धा, जयपुर में स्वर्ण पदक, 2025 चंडीगढ़ विश्वविद्यालय स्पर्धा में 4 स्वर्ण, 1 रजत पदक हासिल किया। चंद्रिका का कहना है वह आज भी ऊर्जा और लगन के साथ निरंतर अभ्यास कर रही हैं। उनका स्पष्ट कथन है कि अभी उड़ान शेष है और कई बड़े स्वप्न पूर्ण करने हैं। महिला दिवस पर चंद्रिका के संघर्ष और सफलता की यह कहानी हर उस युवा के लिए एक संजीवनी है, जो कठिनाइयों से भयभीत होकर अपने कदम पीछे खींच लेते हैं।