- ईरान और चीन ने दिखाया दम अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान के ऊपर बड़ी तैयारी के साथ हमला किया था। डोनाल्ड ट्रंप और नेतन्याहू को लग रहा था, एक सप्ताह के अंदर वह ईरान को घुटनों पर लाकर खड़ा कर देंगे। ईरान में सत्ता परिवर्तन करा देंगे। लेकिन जिस तरह से ईरान ने हर हमले का बढ़-चढ़कर जवाब दिया है उसके बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू के चेहरे उतर गए हैं। ईरान ने जितना नुकसान इजराइल का किया है उससे कहीं ज्यादा नुकसान खाड़ी देशों में जो अमेरिकी सैन्य अड्डे थे वहां पर ईरान ने विध्वंस मचाया है। इससे सारी दुनिया के देश भोंचक्के रह गए हैं। इजरायल ने सोचा था ईरान के सुप्रीमो अयातुल्लाह ख़ामेनेई और प्रथम पंक्ति के नेताओं की हत्या के बाद ईरान के पास सरेंडर करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं होगा। ईरान की जनता सड़कों पर निकल आएगी और विद्रोह कर देगी। लेकिन ठीक इसके उल्टा हुआ। ख़ामेनेई की हत्या के बाद ईरान की सारी जनता एकजुट हो गई। ईरान ने लगातार मिल रही धमकियों को देखते हुए मिसाइलों और ड्रोन के रूप में मुकाबले के लिए जो तैयारी कर रखी थी उसकी जरा सी भी जानकारी इजरायल और अमेरिका को नहीं थी। अमेरिका और इजरायल को यह भी पता नहीं था कि रूस और चीन ईरान की इस तरह से मदद कर सकते हैं, जिसके कारण पहली बार ईरान के साथ जंग में इजरायल और अमेरिका दोनों को ही भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। वही डोनाल्ड ट्रंप और नेतन्याहु को अपनी सत्ता बचाए रखने के लिए अपने ही देश में लड़ना पड़ रहा है। अमेरिका और इजरायल को इसके पहले कभी भी इतना बड़ा नुकसान नहीं उठाना पड़ा जो ईरान के इस युद्ध में उठाना पड़ रहा है। इजरायल ने खबरों पर पूरी तरह से सेंसरशिप लगा दी है। इजरायल में ईरानी हमलों से जो नुकसान हुआ है उसके बारे में कोई भी खबर बाहर निकल कर नहीं आ रही है। खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य अड्डों को ईरान ने पूरी तरह से तबाह कर दिया है। मीडिया में अमेरिका और इजरायल का प्रभाव होने के कारण युद्ध की सही खबरें लोगों तक नहीं पहुंच पा रही हैं, लेकिन जिस तरह से समाचार प्राप्त हो रहे हैं उसमें समझा जा सकता है, कि अमेरिका और इजरायल को इस युद्ध में आर्थिक और सामरिक रूप से भारी नुकसान उठाना पड़ा है। रूस और चीन की मदद ईरान को मिल रही है। कई मामलों में जो मिसाइल, ड्रोन और हथियार ईरान द्वारा उपयोग में लाए जा रहे हैं उन्होंने इजरायल की तकनीकी को भी मात देने का काम किया है। इजरायल भी अपनी सुरक्षा नहीं कर पा रहा है। आयरन डोम और अन्य जो रक्षा उपकरण को लेकर इजरायल दावा करता रहा है वह इस युद्ध में तार-तार हो गए हैं। अमेरिका और इजरायल जिस तरह की दादागिरी सारी दुनिया के देशों के साथ कर रहे थे उसके बाद अप्रत्यक्ष रूप से दुनिया के अधिकांश देश ईरान के पक्ष मे आकर खड़े हो रहे हैं। पिछले एक साल में ट्रंप ने टैरिफ और दादागिरी के रूप में जो कुछ पूरे दुनिया के देशों में बोया था, अब उसकी फसल तैयार है। इस फसल को ट्रंप को काटना ही पड़ेगा। रही सही कसर एपस्टीन फाइल के खुलने से अमेरिका, भारत सहित लगभग एक दर्जन देशों में राजनीतिक रूप से हड़कंप मचा हुआ है। कई बड़े-बड़े नेताओं को इस्तीफा देना पड़ा है। यह तलवार डोनाल्ड ट्रंप के ऊपर भी लटक रही है। अमेरिका की आर्थिक स्थिति इन दिनों बहुत खराब है। डोनाल्ड ट्रंप ने संसद की अनुमति के बिना ईरान पर हमला किया था, इसको लेकर अमेरिका में उनके खिलाफ जबरदस्त विरोध देखने को मिल रहा है। वर्तमान स्थिति को देखते हुए यह कहने में कोई संकोच नहीं है, ईरान पर हमला करके अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इलरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने अपने जीवन की सबसे बड़ी गलती की है। ईरान को जिस तरह से चीन, रूस, उत्तर कोरिया यहां तक कि खाड़ी के देशों का अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन मिलना शुरू हो गया है, उसने ईरान को काफी मजबूत बना दिया है। इसमें ईरान का ही पलड़ा भारी रहने की संभावना व्यक्त की जाने लगी है। अमेरिका के लिए भी यह सबसे बड़ी शिकस्त होगी। अमेरिका के राजनीतिक हलकों में यह भी कहा जाने लगा है। ट्रंप जिस तरह से मनमानी कर रहे हैं वह अपना कार्यकाल पूरा कर पाएंगे इसको लेकर संदेह व्यक्त किया जा रहा है। ईएमएस / 08 मार्च 26