* नारोल इलाके में ऑटो रिक्शा से पकड़ा गया था गांजे का बड़ा जखीरा; एनडीपीएस कोर्ट ने कहा - ऐसे गंभीर अपराधों में दया की गुंजाइश नहीं अहमदाबाद (ईएमएस)| शहर में नशे के कारोबार के खिलाफ सख्त संदेश देते हुए स्पेशल एनडीपीएस कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है। नारोल इलाके में ऑटो-रिक्शा के जरिए करीब 110 किलो गांजा की तस्करी करते पकड़े गए आरोपी चिमन सोलंकी को कोर्ट ने 15 साल की कठोर कैद और 1 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि यह अत्यंत गंभीर अपराध है और ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर आरोपी के प्रति कोई नरमी नहीं बरती जा सकती। मामले के अनुसार 3 अप्रैल 2021 को नारोल पुलिस को सूचना मिली थी कि एक ऑटो-रिक्शा में गांजे का बड़ा जखीरा लेकर कुछ लोग इलाके से गुजरने वाले हैं। सूचना के आधार पर पुलिस ने लंबा तीन रास्ता के पास नाकाबंदी कर संदिग्ध रिक्शा को रोककर तलाशी ली। तलाशी के दौरान रिक्शा की पिछली सीट से खाकी रंग के पांच कार्टन बॉक्स बरामद हुए। जब बॉक्स खोले गए तो उनमें कुल 110.180 किलोग्राम गांजा मिला। इस मामले में पुलिस ने रिक्शा चालक किरीट पंचाल, चिमन सोलंकी और कृष्ण राजपुरोहित को गिरफ्तार किया था। हालांकि, केस की सुनवाई के दौरान रिक्शा चालक किरीट पंचाल की मृत्यु हो जाने से उसके खिलाफ मामला बंद कर दिया गया। वहीं दूसरा आरोपी कृष्णराज राजपुरोहित जमानत पर छूटने के बाद फरार हो गया, जिसके चलते उसे भगोड़ा घोषित कर उसकी सुनवाई अलग कर दी गई है। सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने कोर्ट में दलील दी कि आरोपियों के पास से वाणिज्यिक मात्रा में नशीला पदार्थ बरामद हुआ है, जो समाज के लिए बेहद खतरनाक है। उन्होंने कहा कि युवाओं में बढ़ती नशे की लत को देखते हुए ऐसे अपराधों में शामिल लोगों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी जरूरी है। सरकारी पक्ष ने बताया कि पुलिस द्वारा जुटाए गए सबूत, पंच गवाहों के बयान और जांच प्रक्रिया से यह साफ साबित होता है कि आरोपी गांजा तस्करी में शामिल था। एनडीपीएस एक्ट के तहत यह व्यावसायिक मात्रा का मामला है, इसलिए कानून में कड़ी सजा का प्रावधान है। कोर्ट ने अभियोजन पक्ष के सबूतों और गवाहों को स्वीकार करते हुए चिमनभाई सोलंकी को दोषी करार दिया और उसे 15 साल की कठोर कैद की सजा सुनाई। वहीं इस मामले में एक अन्य आरोपी चंदनसिंह वाघेला को सबूतों के अभाव में अदालत ने बरी कर दिया। सतीश/10 मार्च