नई दिल्ली (ईएमएस)। दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर पर अब मुफ्त सफर के दिन खत्म होने वाले हैं। एनएचएआई ने टोल की दरें तय कर दी हैं, जिससे एक तरफ का खर्च 675 तक पहुंचेगा। हालांकि, एक खास तरीके से आप 340 बचा सकते हैं। लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह टोल वसूली दो महीने बाद आपकी जेब पर भारी पड़ेगी या समय की बचत इसे जायज ठहराएगी? जानिए पूरा गणित। अगर आप भी दिल्ली से देहरादून के बीच नए बने इकोनॉमिक कॉरिडोर का आनंद ले रहे हैं, तो ये जरूरी खबर जान लें। दिल्ली-देहरादून हाईवे पर टोल टैक्स वसूली की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के मुताबिक, अगले दो महीनों के भीतर इस रूट पर टोल व्यवस्था पूरी तरह लागू कर दी जाएगी। राहत की बात यह है कि जो यात्री एक ही दिन में दिल्ली से देहरादून जाकर वापस आने की योजना बनाएंगे, उन्हें टोल में बड़ी छूट मिलेगी। वर्तमान गणना के अनुसार, एक तरफ के सफर के लिए 675 रुपये चुकाने होंगे। दोनों तरफ के सफर के लिए (एक साथ भुगतान पर) मात्र 1010 चुकाने होंगे। जाते समय ही दोनों तरफ का टोल चुकाने पर आपको 340 की सीधी बचत होगी। भारतमाला परियोजना के तहत बना यह 213 किलोमीटर लंबा हाईवे करीब 12,000 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुआ है। एनएचएआई का अनुमान है कि इस हाईवे से सालाना 900 करोड़ रुपये से अधिक की आय होगी। इस हिसाब से अगले 13 सालों में प्रोजेक्ट की पूरी लागत वसूल कर ली जाएगी। शुरुआती तीन महीनों के लिए एक अस्थायी एजेंसी टोल वसूलेगी, जिसके बाद लंबी अवधि के लिए टेंडर जारी किया जाएगा। टेबल में देखते हैं टोल टैक्स की दरें (कार के लिए)। एनएचएआई के आंकड़ों के मुताबिक, इस हाईवे पर चलने वाले वाहनों में 71 प्रतिशत कारें होंगी। यही कारण है कि राजस्व का सबसे बड़ा हिस्सा कार चालकों से आएगा। इसके अलावा भारी वाहनों और मल्टी-एक्सल वाहनों से 11% आय, बस-ट्रक से 11 प्रतिशत आय और हल्के कमर्शियल वाहनों से 3 प्रतिशत आय का अनुमान है। अजीत झा/देवेन्द्र/नई दिल्ली/ ईएमएस/11/मार्च /2026