राज्य
11-Mar-2026
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- संगठनों ने सरकार से समाधान की मांग की, कोर्ट ने पात्रता परीक्षा की अनिवार्य भोपाल (ईएमएस)। शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद प्रदेश के शिक्षकों में चिंता का माहौल देखा जा रहा है। शिक्षक संगठनों ने राज्य सरकार से इस विषय में शिक्षकों के हितों को ध्यान में रखते हुए उचित समाधान निकालने की मांग की है। मध्य प्रदेश कर्मचारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष ठाकुर संतोष सिंह दीक्षित ने कहा कि प्रदेश के बड़ी संख्या में शिक्षक इस निर्णय को लेकर चिंतित हैं। उन्होंने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि शिक्षकों के हित में इस विषय पर आवश्यक कदम उठाए जाएं। उनका कहना है कि जरूरत पडऩे पर कानूनी प्रक्रिया के तहत सुप्रीम कोर्ट में अपील जैसे विकल्पों पर भी विचार किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट का यह था आदेश सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार प्राथमिक और मिडिल स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करना आवश्यक होगा। निर्धारित समय सीमा के भीतर परीक्षा पास नहीं करने की स्थिति में नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। संयुक्त मोर्चा के पदाधिकारियों ने बताया कि इस विषय में सभी शिक्षक संगठनों से चर्चा के बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत अध्यापकों को दो वर्षों के भीतर शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी। उन्होंने बताया कि यदि तय समय में शिक्षक परीक्षा उत्तीर्ण नहीं करते और उनकी सेवानिवृत्ति में पांच वर्षों से अधिक समय शेष है, तो ऐसे मामलों में नियमानुसार सेवानिवृत्ति से संबंधित प्रावधान लागू हो सकते हैं। सभी पक्षों को ध्यान में रखकर निर्णय की मांग पदाधिकारियों ने कहा कि इस विषय में सभी पक्षों को ध्यान में रखते हुए संतुलित निर्णय होना चाहिए। उनका कहना है कि शिक्षक किसी परीक्षा से घबराते नहीं हैं, लेकिन परीक्षा की प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए जो व्यावहारिक और सभी के लिए सहज हो। शिक्षक संगठनों का कहना है कि वे इस विषय में सरकार और संबंधित अधिकारियों से संवाद के माध्यम से समाधान निकालने का प्रयास करेंगे, ताकि शिक्षकों के हित सुरक्षित रह सकें। विनोद / 11 मार्च 26