राज्य
11-Mar-2026


* मुख्यमंत्री के निर्देश पर राजस्व विभाग ने तय की 7 कैटेगरीज, जिला स्तर पर समितियाँ करेंगी पारदर्शी निपटारा गांधीनगर (ईएमएस)| मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने प्रॉमल्गेशन (प्रख्यापित) हुए गाँवों में मापन अंतर्गत रह गईं क्षतियों में सुधार के आवेदनों का एक समान पद्धति तथा योजनाबद्ध ढंग से निस्तारण करने के लिए भूमि सीमांकन के स्पष्ट दिशा-निर्देश राजस्व विभाग की उच्च स्तरीय बैठक में दिए हैं। मुख्यमंत्री ने इस निर्णय के जरिये कृषि भूमि के मापन में प्रख्यापन के बाद किसानों के आपत्ति आवेदनों का निस्तारण पारदर्शी एवं सटीकतापूर्वक ढंग से करके ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को वेग देने के साथ ग्रामीण किसानों के हितों की रक्षा करने का किसान कल्याणकारी दृष्टिकोण अपनाया है। उन्होंने भूमि सीमांकन अंतर्गत राज्य के जिलों में कलेक्टर की अध्यक्षता में भूमि सीमांकन समिति कार्यरत करने तथा जिलों के भूमि सीमांकन कार्यों की समीक्षा करने के निर्देश दिए। इन जिला स्तरीय समितियों में कलेक्टर के अलावा निवासी अपर कलेक्टर, भूमि उप निदेशक (एसएलआर) कार्यालय, प्रांत अधिकारी, डीआईएलआर, तहसीलदार, टीडीओ, भूमि अधिग्रहण अधिकारी, सरदार सरोवर पुनर्वास एजेंसी या अन्य अधिग्रहण संस्था के प्रतिनिधि का समावेश किया जाएगा। भूमि सीमांकन अंतर्गत प्रख्यापन के बाद मापन की क्षति में सुधार के लिए आए आवेदनों के योजनाबद्ध एवं सुचारु निवारण के लिए मुख्यमंत्री के दिशा-निर्देश के चलते राजस्व विभाग द्वारा लगभग सात अलग-अलग श्रेणियाँ (कैटेगरीज) निर्धारित की गई हैं। तद्अनुसार; (1) सरकारी/जन हित की जमीनों में कमी न हुई हो तथा कोई आपत्ति दर्ज न हुई हो (2) सरकारी/जन हित की जमीनों में कमी न हुई हो तथा कोई आपत्ति शेष न हो और कोई खातेदार को आपत्ति न हो (3) सरकारी/जन हित की जमीनों में कमी न हुई हो तथा आपत्ति आवेदन लंबित हो (3ए) सरकारी/जन हित की जमीनों में कमी हुई हो तथा आपत्ति आवेदन लंबित हों (4) गाँव के 30 प्रतिशत से अधिक सर्वे नंबरों में स्वामित्व परिवर्तन (प्रथम-अंतिम) (5) गाँव की आपत्तियाँ एक क्षेत्र तक सीमित हों (6) 30 प्रतिशत से अधिक सर्वे नंबरों में क्षेत्रफल में परिवर्तन तथा कैस्केडिंग इफेक्ट एवं आकृति में अधिक परिवर्तन (7) प्रख्यापन न हुआ हो। इस तरह की सात श्रेणियाँ निर्धारित की गई हैं। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने भूमि सीमांकन अंतर्गत मापन क्षति सुधार की जटिल समस्याओं का त्वरित निवारण हो और साथ ही आवेदकों को कार्यालय में न जाना पड़े; इसके लिए तहसील विकास अधिकारी, तहसीलदार को अधिक अधिकार देकर मोबाइल मजिस्ट्रेट कोर्ट समिति के जरिये गुजरात भूमि राजस्व अधिनियम की धारा 119, 120 तथा भूमि राजस्व नियम, 1972 के नियमों 21(1), 21(2) व 21(3) के अनुसार कार्यवाही कर निवारण लाने के भी निर्दश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने ऐसी मापन क्षति सुधार की अधिकतम समस्याओं का भूमि सीमांकन अंतर्गत राज्यभर में एक समान कार्यपद्धति से तेजी और पारदर्शी ढंग से निवारण लाकर लोगों को सुशासन की सटीक व प्रभावी अनुभूति हो; ऐसा कार्य करने के लिए राजस्व विभाग को निर्देश दिए हैं। सतीश/11 मार्च