राज्य
11-Mar-2026


* ‘चंदा दो-धंधा लो’ मॉडल से मार्ग-मकान विभाग बना भ्रष्टाचार का एपिसेंटर, अहमदाबाद-राजकोट हाईवे 6 साल बाद भी अधूरा अहमदाबाद (ईएमएस)| गुजरात में खराब गुणवत्ता वाली सड़कों के कारण हर साल मानसून में भारी नुकसान होता है, लेकिन क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत अब तक पूरी नहीं हो पाई है। सरकार नई सड़कों की घोषणाएं तो करती है, लेकिन कई सड़कें या तो बनती नहीं हैं और जो बनती हैं उनकी गुणवत्ता बेहद कमजोर होती है। इसी मुद्दे पर भाजपा सरकार के “चंदा दो-धंधा लो, कमलम-कमीशन-घोटाला” मॉडल पर तीखा हमला करते हुए गुजरात प्रदेश कांग्रेस समिति के मीडिया कन्वीनर और प्रवक्ता डॉ. मनीष दोशी ने गंभीर आरोप लगाए। डॉ. दोशी ने कहा कि अहमदाबाद-राजकोट हाईवे का काम वर्ष 2018 में दो साल में पूरा करने की शर्त के साथ शुरू किया गया था, लेकिन निर्धारित समय सीमा समाप्त हुए छह साल से अधिक हो चुके हैं और काम अभी भी पूरा नहीं हुआ है। इसी तरह राजकोट-जेतपुर हाईवे के 60 किलोमीटर के मार्ग में 60 से अधिक डायवर्जन बनाए गए हैं, जिसके कारण लाखों वाहन चालकों को घंटों ट्रैफिक में फंसना पड़ता है। बावजूद इसके प्रशासन टोल टैक्स वसूली में कोई कमी नहीं रख रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि डायवर्जन के रास्तों को पक्का करने की व्यवस्था होने के बावजूद वहां डामर रोड नहीं बनाए जा रहे हैं। राज्य के 34 जिलों में आंतरिक सड़कों की हालत भी लगातार खराब बनी हुई है। मार्ग और मकान विभाग के सचिव का जिला अधिकारियों पर कोई प्रभाव या नियंत्रण दिखाई नहीं देता। डॉ. दोशी के अनुसार, राजस्व विभाग से भी अधिक भ्रष्टाचार मार्ग-मकान विभाग में हो रहा है, जिसके कारण सड़कों की गुणवत्ता सुधर नहीं पा रही है। “गठजोड़” और “व्यवहार” से भरा यह विभाग भ्रष्टाचार का एपिसेंटर बन गया है। उन्होंने कहा कि विधायकों को 10-10 करोड़ रुपये के सड़क कार्यों के जॉब नंबर दिए जाते हैं, लेकिन इन परियोजनाओं को पूरा होने में पांच-पांच साल लग जाते हैं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि विभाग के सचिव पटेलिया के खिलाफ लंबे समय से कई शिकायतें विभिन्न स्थानों से सामने आई हैं, जिनमें खरीद और टेंडर प्रक्रियाओं से जुड़े आरोप भी शामिल हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय तक शिकायतें पहुंचने के बावजूद कोई कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है? कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि सांसद और विधायक भी सड़क निर्माण कार्यों के लिए लगातार फॉलो-अप करते हैं, लेकिन काम आगे नहीं बढ़ता। विभाग की कमजोर कार्यप्रणाली से नागरिक त्राहिमाम कर रहे हैं, फिर भी भाजपा के जनप्रतिनिधि चुप हैं और सवाल उठाने के बजाय केवल सरकार की प्रशंसा करते दिखाई देते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री कार्यालय और मंत्री के रेफरेंस से आने वाली फाइलों को भी गंभीरता से नहीं लिया जाता, जिससे यह स्पष्ट होता है कि भाजपा सरकार में अधिकारी राज हावी हो गया है और जनता को भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है। डॉ. दोशी ने कहा कि गुजरात में कुल 17 राष्ट्रीय राजमार्ग (4032 किमी) और 300 राज्य राजमार्ग (19,761 किमी) हैं, जिनकी निर्माण और रखरखाव की जिम्मेदारी राज्य के मार्ग-मकान विभाग की है। इसके बावजूद सड़कों की हालत लगातार खराब बनी हुई है। उन्होंने बताया कि गुजरात के हाईवे पर एक साल में 5450 करोड़ रुपये का टोल टैक्स वसूला गया है, जिसमें भरथाणा टोल प्लाजा सबसे अधिक कमाई करने वाला टोल प्लाजा है। वर्ष 2024-25 में राज्य के नेशनल हाईवे के टोल प्लाजाओं से 5450.20 करोड़ रुपये की आय हुई, जो प्रतिदिन औसतन 14.93 करोड़ रुपये और प्रति मिनट लगभग 1.04 लाख रुपये के बराबर है। इसके बावजूद राज्य के कई हाईवे पर सड़कों की हालत खस्ताहाल है और गड्ढों से भरी सड़कों के बीच वाहन चालकों से भारी टोल टैक्स वसूला जा रहा है। पिछले तीन वर्षों में गुजरात में वाहन चालकों ने FASTag के माध्यम से 16,000 करोड़ रुपये से अधिक टोल टैक्स के रूप में भुगतान किया है। आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023 में प्रतिदिन औसतन 13.14 करोड़ रुपये टोल टैक्स वसूला जाता था, जो 2024 में बढ़कर 13.44 करोड़ रुपये हो गया और वर्ष 2025 में यह आंकड़ा 17.58 करोड़ रुपये प्रतिदिन तक पहुंच गया। यानी 2023 की तुलना में 2025 में प्रतिदिन औसत वसूली में लगभग 34 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार पेट्रोलियम उत्पादों पर सेल्स टैक्स और वैट के रूप में भी गुजरात सरकार को वर्ष 2024-25 में 24,586 करोड़ रुपये की आय हुई है, जो वर्ष 2020-21 की तुलना में 30 प्रतिशत से अधिक वृद्धि दर्शाती है। डॉ. दोशी ने कहा कि इन सभी आंकड़ों से स्पष्ट है कि गुजरात के नागरिक टोल टैक्स और पेट्रोल टैक्स के जरिए सरकार की तिजोरी भरने में कोई कमी नहीं रखते, लेकिन सवाल यह है कि जब जनता 16,000 करोड़ रुपये से अधिक टोल टैक्स चुका चुकी है, तो उन्हें अच्छी सड़कों की सुविधा क्यों नहीं मिल रही? उन्होंने कहा कि आय लगातार बढ़ रही है, लेकिन सुविधाओं के नाम पर सड़कें आज भी खस्ताहाल दिखाई देती हैं। सतीश/11 मार्च