भ्रूण प्रकरण के बाद सुरक्षा प्रोटोकॉल पर उठे सवाल जबलपुर, (ईएमएस)। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर बेंच में एक व्यक्ति के मृत भ्रूण लेकर कोर्ट परिसर तक पहुंच जाने की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। हालांकी चार पुलिसकर्मियों के निलंबन के बाद अब चर्चा सिर्फ लापरवाही तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भी सवाल उठ रहा है कि देश के अन्य हाईकोर्ट की तुलना में जबलपुर बेंच की सुरक्षा व्यवस्था कितनी सख्त और प्रभावी है। जबलपुर बेंच की मौजूदा व्यवस्था …. हाईकोर्ट परिसर में कुल छह प्रवेश द्वार हैं। आम लोगों के लिए एक निर्धारित गेट से प्रवेश की अनुमति दी जाती है, जहां पहले गेट पास बनाया जाता है और उसके बाद तलाशी की प्रक्रिया होती है। भवन के भीतर प्रवेश से पहले दोबारा जांच की व्यवस्था भी बताई जाती है। सूत्रों के अनुसार कार्यदिवस में लगभग 35 पुलिसकर्मी तैनात रहते हैं, जिनमें एक एडिशनल एसपी स्तर के अधिकारी, तीन निरीक्षक और अन्य सुरक्षाकर्मी शामिल हैं। हालिया घटना में दोहरी जांच के बावजूद प्रतिबंधित सामग्री का भीतर पहुंच जाना सुरक्षा प्रणाली की प्रभावशीलता पर सवाल खड़ा करता है। क्या जबलपुर में स्टाफ पर्याप्त है?........... जबलपुर बेंच में तैनात पुलिसकर्मियों की संख्या लगभग 35 बताई जाती है। रोजाना बड़ी संख्या में वकील, पक्षकार और आम नागरिक परिसर में आते हैं। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि केवल संख्या पर्याप्त नहीं, बल्कि प्रशिक्षण, उपकरणों की गुणवत्ता और नियमित सुरक्षा ऑडिट भी जरूरी है। स्थानीय अधिवक्ताओं का कहना है कि भीड़ के समय तलाशी प्रक्रिया औपचारिक बनकर रह जाती है। यदि स्कैनिंग उपकरण उपलब्ध हैं तो उनकी कार्यक्षमता और निगरानी की समीक्षा आवश्यक है। सुरक्षा आडिट की जरूरत… चार सुरक्षाकर्मियों के निलंबन के बाद अब निगाहें इस बात पर हैं कि क्या व्यापक सुरक्षा ऑडिट कराया जाएगा। क्या तकनीकी उन्नयन और अतिरिक्त स्टाफ की आवश्यकता का आकलन होगा? हालिया घटना ने स्पष्ट कर दिया है कि केवल गार्ड की तैनाती पर्याप्त नहीं, बल्कि मजबूत और पारदर्शी सुरक्षा तंत्र की जरूरत है। देश के अन्य हाईकोर्ट की तुलना में जबलपुर बेंच की व्यवस्था को लेकर उठे सवाल अब प्रशासनिक निर्णयों की दिशा तय करेंगे। सुनील साहू / शहबाज / 12 मार्च 2026/ 06.19