अंतर्राष्ट्रीय
13-Mar-2026
...


ब्रेसिलिया (ईएमएस)। हाल ही में ब्राजील में वैज्ञानिकों ने ऐसी खोज की है जो किसी साइंस फिक्शन फिल्म जैसी प्रतीत होती है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, लगभग 6.3 मिलियन साल पहले एक एक्स्ट्राटेरेस्ट्रियल ऑब्जेक्ट ब्राजील से टकराया था। लेकिन इस घटना में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इतनी भीषण टक्कर के बावजूद वहां कोई क्रेटर नहीं पाया गया। वैज्ञानिकों ने इस प्राचीन टक्कर का पता ‘टेक्टाइट्स’ के माध्यम से लगाया। टेक्टाइट्स ऐसे प्राकृतिक कांच के टुकड़े होते हैं, जो तब बनते हैं जब कोई ब्रह्मांडीय पिंड पृथ्वी की सतह से भयंकर गति और शक्ति से टकराता है। टक्कर के दौरान सतह की चट्टानें पिघलकर वायुमंडल में उछलती हैं और फिर ठंडी होकर कांच जैसी कठोर संरचना में बदल जाती हैं। देखने में ये काले और अपारदर्शी लगते हैं, लेकिन रोशनी में ये भूरे-हरे और पारभासी दिखाई देते हैं। आकार में ये टुकड़े आंसू जैसी बूंद, गोलाकार या डंबल जैसे भी हो सकते हैं। ब्राजील के मिनस गेरैस राज्य में सबसे पहले पाए जाने के कारण इन्हें ‘गेराइसीट्स’ कहा गया। प्रारंभिक खोज के दौरान ये टुकड़े मिनस गेरैस के उत्तरी हिस्से में तैयाओबेरास, कर्रल डी डेंट्रो और साओ जोआओ डेल पाराइसो में मिले थे। बाद में बाहिया और पिआउई राज्यों में भी इनके नमूने पाए गए। अब तक लगभग 900 किलोमीटर के क्षेत्र में 600 से अधिक टेक्टाइट्स मिले हैं, जिनका वजन 1 ग्राम से लेकर 85.4 ग्राम तक और लंबाई 5 सेंटीमीटर तक है। स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ कैम्पिनास के भूविज्ञानी प्रो. अलवारो पेंटियाडो क्रोस्टा के अनुसार यह क्षेत्र दुनिया भर के अन्य टेक्टाइट क्षेत्रों के अनुरूप है और इसका आकार टक्कर की ऊर्जा पर निर्भर करता है। ब्राजील में पाए गए यह टेक्टाइट क्षेत्र इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि दुनिया भर में अब तक केवल पांच प्रमुख टेक्टाइट क्षेत्र ही जाने गए हैं: ऑस्ट्रेलिया, मध्य यूरोप, आइवरी कोस्ट, उत्तरी अमेरिका और बेलीज। इनमें से केवल तीन क्षेत्रों में ही क्रेटर मौजूद हैं। प्रो. क्रोस्टा के अनुसार, गेराइसीट्स के आसपास मौजूद छोटे-छोटे छेद वायुमंडल में पिघले पदार्थ के तेजी से ठंडा होने और गैस के बुलबुलों के कारण बने हैं। यह खोज दक्षिण अमेरिका के भूवैज्ञानिक इतिहास में बेहद दुर्लभ मानी जा रही है और यह साबित करती है कि प्राचीन समय में भी ब्रह्मांडीय टकरावों ने पृथ्वी की सतह और वातावरण पर गहरा प्रभाव डाला था। सुदामा/ईएमएस 13 मार्च 2026