अंतर्राष्ट्रीय
13-Mar-2026
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मॉस्को(ईएमएस)। युद्ध के मैदान में जब मौत आसमान से बरसती है, तो उसकी आहट भी सुनाई नहीं देती। वर्तमान रूस-यूक्रेन संघर्ष में स्टॉर्म शैडो महज एक मिसाइल नहीं, बल्कि रूस के लिए वह अदृश्य काल बन गई है जो रडार की नजरों में आए बिना सरहदें लांघ जाती है। ब्रिटेन द्वारा यूक्रेन को सौंपी गई इस साइलेंट किलर मिसाइल ने हाल ही में रूस के ब्रांस्क शहर में स्थित एक मिसाइल प्लांट पर हमला कर भारी तबाही मचाई है। इस हमले ने न केवल पुतिन के सैन्य विशेषज्ञों की नींद उड़ा दी है, बल्कि यह भी साबित कर दिया है कि अब रूस की सीमा के भीतर कोई भी कोना पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। करोड़ों की कीमत वाली यह मिसाइल तकनीक और तबाही का वह घातक संगम है, जो युद्ध की दिशा बदलने की ताकत रखती है। रूस ने हाल ही में ऐसी दो मिसाइलों को मार गिराने का दावा किया है, लेकिन ब्रांस्क में हुए सफल प्रहार ने इसकी सटीकता पर मुहर लगा दी है। स्टॉर्म शैडो एक लॉन्ग-रेंज एयर-लॉन्च क्रूज मिसाइल है, जिसे मुख्य रूप से दुश्मन के सुरक्षित बंकरों, रडार ठिकानों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को जमींदोज करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी लो-एल्टीट्यूड उड़ान है; यह जमीन के बेहद करीब से उड़ती है, जिससे दुश्मन के रडार और एयर डिफेंस सिस्टम इसे समय रहते पकड़ नहीं पाते। इस मिसाइल की मारक क्षमता लगभग 250 से 560 किलोमीटर तक है। इसमें 450 किलोग्राम का ब्रोच वॉरहेड लगा होता है, जो दो चरणों में काम करता है। पहले चरण में यह कंक्रीट या बंकर की अभेद्य बाहरी दीवार को तोड़ता है और फिर अंदर जाकर भीषण धमाका करता है। यही कारण है कि जब यह हमला करती है, तो कंक्रीट की मोटी दीवारें भी कागज की तरह फट जाती हैं। यह दागो और भूल जाओ की तकनीक पर काम करती है। एक बार विमान से छोड़े जाने के बाद इसे गाइड करने की जरूरत नहीं होती। यह जीपीएस, इनर्शियल नेविगेशन और टेरेन रेफरेंसिंग तकनीक का उपयोग करके अपने लक्ष्य को खुद ढूंढ लेती है। हमले के अंतिम क्षणों में यह मिसाइल अपना इंफ्रारेड कैमरा खोलती है और पूर्व-निर्धारित लक्ष्य की सटीक पहचान कर उस पर काल बनकर टूटती है। रूस-यूक्रेन युद्ध में यह एक बड़े गेम-चेंजर हथियार के रूप में उभरी है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह मिसाइलों का वह दौर है जहाँ जंग सिर्फ संख्या बल से नहीं, बल्कि उस खामोश सटीकता से जीती जाती है जो स्टॉर्म शैडो की पहचान है। ब्रांस्क के मिसाइल प्लांट पर हुआ ताजा हमला इसी रणनीति का हिस्सा है, जिसने रूस के रक्षा कवच में बड़ा छेद कर दिया है। वीरेंद्र/ईएमएस 13 मार्च 2026