नई दिल्ली (ईएमएस)। स्ट्रोक के मामले में हर मिनट बेहद महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि जितनी जल्दी मरीज को इलाज मिलता है, उतनी ही बेहतर रिकवरी की संभावना रहती है। इसी कारण नेशनल हेल्थ मिशन लोगों को स्ट्रोक के लक्षणों को नजरअंदाज न करने और तुरंत चिकित्सा सहायता लेने की सलाह देता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि स्ट्रोक के लक्षणों को याद रखने का सबसे आसान तरीका ‘बचाव’ फॉर्मूला है। यह तरीका लोगों को स्ट्रोक के शुरुआती संकेतों को पहचानने में मदद करता है और समय पर अस्पताल पहुंचने के लिए सचेत करता है। स्ट्रोक में थोड़ी भी देरी मस्तिष्क को स्थायी नुकसान पहुंचा सकती है। ऐसे में तुरंत अस्पताल पहुंचने पर मरीज को क्लॉट-बस्टिंग दवाएं या अन्य जरूरी उपचार दिए जा सकते हैं, जिससे रिकवरी की संभावना बढ़ जाती है। ‘बचाव’ फॉर्मूला के तहत सबसे पहला संकेत है ‘ब’ यानी बाजू। यदि किसी व्यक्ति को दोनों हाथ ऊपर उठाने के लिए कहा जाए और एक हाथ नीचे गिर जाए या कमजोर महसूस हो, तो यह स्ट्रोक का संकेत हो सकता है। दूसरा संकेत है ‘च’ यानी चेहरा। यदि व्यक्ति मुस्कुराने की कोशिश करे और चेहरे का एक हिस्सा लटकता हुआ या असमान दिखाई दे, तो यह भी खतरे का संकेत है। तीसरा संकेत ‘आ’ यानी आवाज से जुड़ा है। यदि व्यक्ति को कोई सरल वाक्य बोलने या दोहराने को कहा जाए और उसकी आवाज अस्पष्ट हो जाए, तुतलाहट हो या बोलने में कठिनाई हो, तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए। चौथा और सबसे महत्वपूर्ण है ‘व’ यानी वक्त। यदि ऊपर बताए गए लक्षणों में से कोई भी दिखाई दे, तो समय बर्बाद किए बिना तुरंत 108 पर कॉल कर एम्बुलेंस बुलानी चाहिए और मरीज को ऐसे अस्पताल ले जाना चाहिए जहां सीटी स्कैन जैसी सुविधाएं उपलब्ध हों। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक स्ट्रोक के लक्षण आमतौर पर अचानक दिखाई देते हैं और अक्सर शरीर के एक हिस्से को प्रभावित करते हैं। इसके अलावा अचानक संतुलन बिगड़ना, आंखों में धुंधलापन आना या तेज सिरदर्द होना भी इसके संकेत हो सकते हैं। स्ट्रोक को कई बार ‘साइलेंट किलर’ भी कहा जाता है, क्योंकि यह बिना किसी स्पष्ट चेतावनी के भी हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लोग ‘बचाव’ फॉर्मूला को समझ लें, तो अधिकांश मामलों में स्ट्रोक की पहचान जल्दी की जा सकती है। इसके साथ ही स्ट्रोक से बचाव के लिए रक्तचाप, शुगर और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखना, धूम्रपान और शराब से दूरी बनाना, नियमित व्यायाम करना और संतुलित आहार लेना बेहद जरूरी है। इन सावधानियों से इस गंभीर बीमारी के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। एक्सपर्ट की माने तो स्ट्रोक या ब्रेन अटैक एक गंभीर और जानलेवा स्थिति है, जो तब होती है जब मस्तिष्क तक रक्त की आपूर्ति अचानक बाधित हो जाती है। ऐसी स्थिति में मस्तिष्क की कोशिकाएं तेजी से क्षतिग्रस्त होने लगती हैं। सुदामा/ईएमएस 13 मार्च 2026