नई दिल्ली (ईएमएस)। सीलिएक बीमारी से पीड़ित व्यक्ति ग्लूटेन युक्त भोजन करता है, तो उसकी छोटी आंत की परतों को नुकसान पहुंचता है। इसके कारण शरीर भोजन से मिलने वाले जरूरी पोषक तत्वों को सही तरीके से अवशोषित नहीं कर पाता और इसका असर धीरे-धीरे पूरे स्वास्थ्य पर दिखाई देने लगता है। विशेषज्ञों के अनुसार सीलिएक रोग से पीड़ित लोगों के लिए ग्लूटेन-फ्री डाइट अपनाना बेहद जरूरी होता है। सही खानपान न केवल शरीर को नुकसान से बचाता है, बल्कि पोषण की कमी को भी दूर करता है और मरीज को बेहतर व सक्रिय जीवन जीने में मदद करता है। यदि मरीज लगातार ग्लूटेन का सेवन करते रहें, तो उन्हें पेट दर्द, डायरिया, कब्ज, अत्यधिक थकान और तेजी से वजन कम होने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। लंबे समय तक ग्लूटेन लेने से स्थिति और गंभीर हो सकती है। इससे शरीर में खून की कमी, हड्डियों की कमजोरी और विभिन्न विटामिनों की कमी जैसी समस्याएं भी विकसित हो सकती हैं। इसलिए डॉक्टर और पोषण विशेषज्ञ सीलिएक मरीजों को ग्लूटेन युक्त खाद्य पदार्थों से पूरी तरह दूरी बनाने की सलाह देते हैं। ग्लूटेन-फ्री डाइट में किन चीजों को शामिल करना चाहिए, यह समझना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इस तरह के आहार में ताजे फल, हरी सब्जियां, मिलेट्स यानी मोटे अनाज, कॉर्न मील, बीन्स और नट्स जैसी चीजें सुरक्षित मानी जाती हैं। इन खाद्य पदार्थों से शरीर को पर्याप्त मात्रा में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और फाइबर मिलता है, जो शरीर को ऊर्जा देने और पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में मदद करता है। दूसरी ओर, ब्रेड, पास्ता, केक और पिज्जा जैसे खाद्य पदार्थों से परहेज करना जरूरी है, क्योंकि ये आमतौर पर गेहूं, जौ, राई या कुछ प्रकार के ओट्स से बनाए जाते हैं जिनमें ग्लूटेन मौजूद होता है। इनका सेवन करने से बीमारी के लक्षण और गंभीर हो सकते हैं और मरीज की परेशानी बढ़ सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि ग्लूटेन-फ्री डाइट केवल बीमारी को नियंत्रित करने के लिए ही नहीं, बल्कि लंबे समय तक स्वस्थ जीवन बनाए रखने के लिए भी जरूरी है। इससे पेट और आंत से जुड़ी समस्याएं कम होती हैं, शरीर को आवश्यक पोषण मिलता है और ऊर्जा का स्तर भी बना रहता है। इसके साथ ही सीलिएक मरीजों को बाहर खाना खाते समय भी विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। सुदामा/ईएमएस 13 मार्च 2026