राष्ट्रीय
13-Mar-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। दुनिया भर में योग को स्वस्थ जीवन के लिए एक प्रभावी और आसान उपाय माना जाता है। यह आसन शरीर को लचीला बनाने के साथ-साथ मानसिक शांति प्रदान करने में भी मददगार माना जाता है। मारीच्यासन का नाम प्राचीन ऋषि मारीची के नाम पर रखा गया है। संस्कृत में ‘मारीच’ का अर्थ प्रकाश की किरण यानी सूर्य या चंद्रमा की किरण से होता है, जबकि ‘आसन’ का अर्थ बैठने की मुद्रा या योग की स्थिति है। इस आसन के अभ्यास के दौरान शरीर को मोड़ने और खिंचाव देने की प्रक्रिया होती है, जिससे कंधों, गर्दन, कमर और पैरों की मांसपेशियों को अच्छा स्ट्रेच मिलता है। मिनिस्ट्री ऑफ आयुष के अनुसार मारीच्यासन रीढ़ की हड्डी यानी मेरुदंड को लचीला बनाने में मदद करता है और पाचन क्रिया को बेहतर बनाने में भी सहायक माना जाता है। इसके नियमित अभ्यास से मधुमेह के प्रबंधन में भी सकारात्मक असर देखा गया है। यह आसन शरीर की कार्यक्षमता को पुनर्जीवित करने में मदद करता है और शरीर में ऊर्जा के स्तर को बढ़ाता है। योग विशेषज्ञों के मुताबिक इस आसन के अभ्यास से शरीर में रक्त संचार बेहतर होता है और मानसिक तनाव कम होता है। इसके अलावा यह पेट के कई महत्वपूर्ण अंगों को सक्रिय करने में मदद करता है, जिनमें लिवर, किडनी, प्लीहा, अग्न्याशय, छोटी आंत और पित्ताशय शामिल हैं। इन अंगों की सक्रियता से पाचन तंत्र मजबूत होता है और शरीर का संतुलन बेहतर बना रहता है। मारीच्यासन को करना अपेक्षाकृत आसान माना जाता है। इसे करने के लिए सबसे पहले जमीन पर दंडासन की मुद्रा में बैठें। इसके बाद दाहिने घुटने को मोड़कर बाएं हाथ को दाहिनी जांघ के बाहर रखें। फिर सांस छोड़ते हुए शरीर को दाईं ओर मोड़ें और पीछे की ओर देखने की कोशिश करें। यदि संभव हो तो दोनों हाथों को पीठ के पीछे पकड़ने का प्रयास करें। इस स्थिति में 5 से 10 गहरी सांसें लें और फिर दूसरी तरफ भी इसी प्रक्रिया को दोहराएं। योग विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि शुरुआती लोग इस आसन का अभ्यास धीरे-धीरे और किसी योग शिक्षक की देखरेख में करें। अभ्यास के दौरान सांसों पर ध्यान देना और जल्दबाजी से बचना जरूरी है। नियमित योग अभ्यास से न केवल शारीरिक स्वास्थ्य बेहतर होता है, बल्कि मानसिक शांति भी मिलती है। हालांकि, गर्भवती महिलाओं, गंभीर कमर दर्द से पीड़ित लोगों या हाल ही में सर्जरी करवा चुके व्यक्तियों को इस आसन का अभ्यास करने से पहले डॉक्टर या विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लेनी चाहिए। सुदामा/ईएमएस 13 मार्च 2026