खेल
13-Mar-2026
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मुम्बई (ईएमएस)। भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान सूर्यकुमार यादव का मानना है कि समय के साथ ही खेल की रफ्तार भी बदल रही है, ऐसे में आक्रामक अंदाज अपनाना सफल रहा। वहीं अगर अगर भारतीय टीम पिछले टी20 विश्व कप की तरह खेलती तो उसे इसबार शायद ही जीत मिलती। सूर्या का कहना है कि पिछली बार जब रोहित शर्मा और विराट कोहली के समय भारतीय टीम जीती थी तब हालात अलग थे। वहीं अब अलग हैं। कप्तान रोहित और कोच राहुल द्रविड़ के नेतृत्व में भारतीय टीम का खेल बेहद संतुलित और अनुभव पर आधारित माना जाता था। यह रणनीति 2024 तक प्रभावी रही पर दो साल बाद टी20 क्रिकेट की बदलती मांगों के सामने यह थोड़ी धीमी और पारंपरिक लगने लगी। इसी कारण सूर्यकुमार और मुख्य कोच गौतम गंभीर ने इस बार खिलाड़ियों को निडर होकर खेलने को कहा। इससे टीम में यह साफ संदेश दिया गया कि अब कोई भी खिलाड़ी निजी उपलब्धियों के पीछे न जाकर टीम की जीत के लिए खेलेगा। इसी कारण जरूरत के अनुसार किसी भी खिलाड़ी को किसी भी क्रम पर उतारा गया। सूर्यकुमार ने कहा, हमें पता था कि 2024 टी20 विश्व कप में जिस तरह का क्रिकेट हमने खेला था, वह आगे काम नहीं करेगा। इसलिए हमने तय किया कि अब व्यक्तिगत रिकॉर्ड पर ध्यान नहीं देंगे, हमारा ध्यान सिर्फ मैच जीतना होगा। इसी कारण सेमीफाइनल तक हमारे किसी भी खिलाड़ी का नाम सबसे ज्यादा रन बनाने वालों या सबसे ज्यादा विकेट लेने वालों की सूची में नहीं था पर इसके बाद भी हम जीत रहे थे। इस कारण है कि हर खिलाड़ी योगदान दे रहा था। उन्होंने आगे कहा कि इस सोच को टीम में शुरू से ही मजबूत करना जरूरी था।वहीं भारतीय टीम के बल्लेबाजी कोच सितांशु कोटक से भी माना है कि साल 2024 और 2026 की टीमों के बीच अंतर था। उनका मानना है कि 2024 की टीम अनुभव से भरी थी पर उसमें इतनी आक्रामकता नहीं थी। तब रोहित आक्रामक होकर खेलते थे जबकि विराट एक छोर संभाले रहते थे। वहीं अब टीम में कम अनुभव वाले खिलाड़ी हैं, लेकिन उनमें आक्रामकता और आत्मविश्वास भरा हुआ है। टीम में तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह और हार्दिक पंड्या जैसे खिलाड़ी संतुलन लाते हैं, जबकि अभिषेक शर्मा जैसे युवा खिलाड़ी अपनी अलग शैली के साथ विरोधी टीम पर दबाव बना देते हैं। गिरजा/ईएमएस 13 मार्च 2026