राज्य
14-Mar-2026


एनएसएस का विकासखंड कालसी में आयोजित सात दिवसीय विशेष शिविर का चतुर्थ दिवस देहरादून (ईएमएस)। सरदार महिपाल राजेन्द्र जनजातीय पीजी कॉलेज, साहिया की राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) इकाई के तत्वावधान में ग्राम ककाड़ी, विकासखंड कालसी में आयोजित सात दिवसीय विशेष शिविर के चतुर्थ दिवस पर परम्परागत औषधीय ज्ञान एवं ग्रामीण स्वास्थ्य विषय पर विशेष प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान कार्यक्रम का उद्देश्य जौनसार- बावर क्षेत्र में उपलब्ध औषधीय पौधों के पारम्परिक ज्ञान को संरक्षित करना और स्वयंसेवकों और ग्रामीणों को स्वस्थ जीवनशैली के प्रति प्रेरित करना था। कार्यक्रम का शुभारंभ एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी वरुण प्रसाद सेमवाल ने अतिथियों के स्वागत के साथ किया। इस दौरान कार्यक्रम में मुख्य अतिथि, समाजसेवी एवं जड़ी-बूटी विशेषज्ञ अमर सिंह चैहान ने जौनसार बावर क्षेत्र में पाई जाने वाली विभिन्न औषधीय वनस्पतियों के महत्व और उनके उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जौनसार-बावर के पहाड़ी क्षेत्रों में आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों की भरपूर संभावनाएं मौजूद हैं और यदि इनका संरक्षण एवं वैज्ञानिक ढंग से उपयोग किया जाए तो यह क्षेत्र आयुर्वेदिक औषधियों के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है। उन्होंने बताया कि हमारे आसपास उपलब्ध अनेक प्राकृतिक जड़ी-बूटियाँ सामान्य बीमारियों से लेकर कई गंभीर रोगों के उपचार में उपयोगी सिद्ध होती हैं। उन्होंने तुलसी, नीम, गिलोय, हल्दी, अदरक, आंवला, सतावर, पथरचट्टा, एलोवेरा, भकुम्भरा और कालाभांसा जैसी औषधीय वनस्पतियों के गुणों एवं उनके पारम्परिक उपयोग के बारे में जानकारी दी। कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि केशो देवी ग्राम ककाड़ी ने बताया कि वह वर्षों से पारम्परिक ज्ञान के आधार पर ग्रामीणों का उपचार करती आ रही हैं। उन्होंने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में कई औषधीय पौधे आधुनिकीकरण और वनों की कटाई के कारण धीरे-धीरे कम होते जा रहे हैं, इसलिए इनका संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने यह भी बताया कि यदि इन प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा की जाए और पारम्परिक ज्ञान को नई पीढ़ी तक पहंुचाया जाए तो यह भविष्य के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगा। इस अवसर पर अनेक स्वयंसेवक उपस्थित रहे। शैलेन्द्र नेगी/ईएमएस/14 मार्च 2026