नई दिल्ली,(ईएमएस)। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और उसके भारत पर संभावित प्रभाव को लेकर संसद में बहस की मांग तेज हो गई है। विपक्ष ने दोनों सदनों में इस मुद्दे पर चर्चा कराने की मांग की है। वहीं सरकार ने इस मांग पर विचार करने की बात कही है। शनिवार को सत्ता प्रतिष्ठान में इस पर मंथन हुआ। उम्मीद है कि संसदीय कार्य मंत्रालय के माध्यम से सोमवार को लोकसभा स्पीकर को इस बात की आधिकारिक सूचना दे दी जाएगी। उसके बाद बिजनेस एडवाइजरी कमेटी में दिन, समय निश्चित किया जाएगा। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ-साथ भारत की अर्थव्यवस्था और यहां रहने वाले लोगों के जीवन पर भी पड़ सकता है। इसलिए इस विषय पर संसद में विस्तृत चर्चा की मांग विपक्ष के पुरजोर तरीके से रखी थी। सरकार की ओर से फिलवक्त तक इस विषय को लेकर चुप्पी है। विपक्ष के एक नेता ने बताया कि लोकसभा अध्यक्ष ने सुझाव दिया है कि पश्चिम एशिया की स्थिति पर नियम 193 के तहत अल्पकालिक चर्चा कराई जा सकती है, जिसके माध्यम से सांसद तत्काल और महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी बात रख सकते हैं। जानकारी के मुताबिक सरकार ने विपक्ष को यह भी बताया कि वह कुछ मंत्रालयों के कामकाज पर चर्चा के लिए तैयार है। इनमें रेल मंत्रालय, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय और गृह मंत्रालय शामिल हैं। राज्यसभा में पहले ही पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय तथा ग्रामीण विकास मंत्रालय के कामकाज पर चर्चा हो चुकी है। सरकार ने संकेत दिया है कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय तथा खेल मंत्रालय के कामकाज पर भी चर्चा कराई जा सकती है।कुल मिलाकर संसद के आगामी सत्र में पश्चिम एशिया की स्थिति, मंत्रालयों के कामकाज पर चर्चा और लंबित विधेयकों को पारित कराने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे केंद्र में रहने वाले हैं। विपक्ष जहां सरकार को जवाबदेह बनाने की कोशिश कर रहा है, वहीं सरकार विधायी कार्यों को समय पर पूरा कराने पर जोर दे रही है। वीरेंद्र/ईएमएस/15मार्च2026