राष्ट्रीय
15-Mar-2026
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फुल टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और सोर्स कोड देना भी शामिल नई दिल्ली (ईएमएस)। भारतीय वायुसेना फाइटर जेट्स की कमी को पूरा करने के लिए फ्रांस के साथ 114 राफेल फाइटर जेट को लेकर डील करने की तैयारी में है। उसके बावजूद भारत की सबसे बड़ी टेंशन 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट को लेकर है क्योंकि चीनी एयरफोर्स पहले से ही जे-20 और जे-35 जैसे लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल कर रही है। खबर आ रही हैं कि चीन, पाकिस्तान के साथ 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स को लेकर डील कर सकता है। वहीं भारत को 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट के लिए अमेरिका और रूस से ऑफर मिला है, हालांकि अब तक इस लेकर कोई हामी नहीं भरी है। इस बीच रूस की ओर से भारत को एसयू-57एम1ई के लिए ऐसा ऑफर दिया है, इसके बाद भारत को मना करना मुश्किल भरा होगा। रूस ने भारत को एसयू-57 स्टेल्थ फाइटर जेट का अपडेटेड वाला वर्जन ऑफर किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों देशों के अधिकारियों की हाई लेवल की मीटिंग में रूस की ओर से डबल सीट वाले इस एसयू-57 को लेकर ऑफर दिया गया है। मॉस्को की ओर से दिए गए प्रस्ताव में फुल टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और सोर्स कोड देना भी शामिल है, जिस तरह ब्रह्मोस और अस्त्र मिसाइलों का दिया गया है। रूस की योजना है कि भारत फिफ्थ जेनरेशन फाइटर एयरक्राफ्ट (एफजीएफए) को फिर से पटरी पर लाया जाए, जिसमें दोनों देश मिलकर इसका उत्पादन कर सकते है। खबरों के मुताबिक, रूस की यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन (यूएसी) ने एक योजना का विस्तृत विवरण दिया है, जिसके तहत भारत को 5वीं पीढ़ी के इस फाइटर जेट के महत्वपूर्ण सामानों का निर्माण घरेलू स्तर पर करने की अनुमति मिलेगी। इस प्रस्ताव में काफी महंगी टेक्नोलॉजी शामिल है, जैसे अगली पीढ़ी के इंजन, रडार सिस्टम और अपडेटेड ऑप्टिकल सेंसर, सोर्स कोड तक पहुंच, जिससे ब्रह्मोस और अस्त्र मिसाइलों जैसे स्वदेशी भारतीय हथियारों को एकीकृत करना संभव हो सकेगा। बता दें कि भारत ने साल 2018 में बढ़ती लागत, भारतीय इंजीनियरों को कम कार्य दिए जाने और फाइटर जेट की स्टेल्थ क्षमता और इंजन प्रदर्शन पर शक का हवाला देकर इस कार्यक्रम से खुद को अलग कर लिया था। उसके बाद से ही भारतीय वायु सेना (आईएफए) ने एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट को प्राथमिकता दी है। हालांकि एएमसीए प्रोटोटाइप की पहली उड़ान 2029 तक प्रस्तावित है और बड़े पैमाने पर उत्पादन 2030 के दशक के मध्य तक होने की उम्मीद नहीं है। इसके बाद रूस भारत की बढ़ती स्टेल्थ क्षमता की कमी को पूरा करने के लिए एसयू-57 को एक महत्वपूर्ण स्ट्रैटजिक ब्रिज के रूप में पेश कर रहा है। रूसी डिफेंस इंडस्ट्री का कहना है कि इस डबल सीट वाले प्रोटोटाइप का एयरफ्रेम पहले से ही कोम्सोमोल्स्क-ऑन-अमूर विमान संयंत्र में असेंबल किया जा रहा है। भारतीय वायु सेना ने अपडेटेड एसयू-57एम1ई में नए सिरे से रुचि दिखाई है, हालांकि दिल्ली अभी भी सतर्क है। सूत्रों का कहना है कि भारतीय वायु सेना को मॉडर्न बनाए रखने के लिए कम से कम दो स्क्वाड्रन (40) फाइटर जेट की डील कर सकती है, लेकिन उसकी प्राथमिकता एएमसीए ही रहेगा। आशीष/ईएमएस 15 मार्च 2026