-कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने किया विश्लेषण-युद्ध क्रूर, निरर्थक और मूर्खतापूर्ण होता है नई दिल्ली,(ईएमएस)। अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान के खिलाफ शुरू किए गए सैन्य अभियान के वैश्विक प्रभावों पर चिंता जताते हुए वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कहा है कि इस युद्ध की असली कीमत दुनिया भर के आम लोग चुकाएंगे। उन्होंने अपने विश्लेषण में लिखा कि ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के दो सप्ताह के अंदर ईरान को भारी तबाही का सामना करना पड़ा है, लेकिन वह पराजित नहीं हुआ है। मीडिया रिपोर्ट में चिदंबरम के मुताबिक युद्ध के शुरुआती चरण में ही ईरान के शीर्ष नेतृत्व को बड़ा नुकसान हुआ, हालांकि इसके बाद देश ने तेजी से नया राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व स्थापित कर लिया। इस बीच अली खामेनेई समेत शीर्ष नेतृत्व पर हमलों के बाद भी संघर्ष जारी है। ईरान की राजधानी तेहरान समेत सनंदाज और इस्फहान जैसे शहरों पर भारी बमबारी की गई, जिसमें हजारों लोग मारे गए या घायल हुए हैं। एक अमेरिकी टॉमहॉक मिसाइल के स्कूल पर हमले से बड़ी संख्या में छात्राओं और शिक्षकों की मौत की हुई है। उन्होंने कहा कि युद्ध में केवल सैन्य ठिकानों को ही नहीं, बल्कि नागरिक ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचा है। मिसाइल प्रक्षेपण ठिकानों, सैन्य अड्डों, नौसेना की संपत्तियों और हवाई सुरक्षा प्रणाली के साथ-साथ घरों, स्कूलों, अस्पतालों और तेल भंडारण केंद्रों को भी निशाना बनाया गया है। इसके अलावा जल आपूर्ति प्रणाली, विलवणीकरण संयंत्र और अन्य आवश्यक बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचा है, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण पर गंभीर खतरा पैदा हो गया है। चिदंबरम के मुताबिक युद्ध की पृष्ठभूमि में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर विवाद रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने आरोप लगाया था कि ईरान परमाणु हथियार बनाने के करीब पहुंच गया है, हालांकि इस दावे को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई सवाल उठाए गए हैं। उन्होंने पूछा कि क्या अमेरिका ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम की स्वतंत्र जांच करवाई थी। उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम एशिया की राजनीति में इजराइल की भूमिका और क्षेत्रीय संघर्षों का लंबा इतिहास रहा है। भारत ने 1950 में इजराइल को मान्यता दी थी और 1992 में दोनों देशों के बीच पूर्ण राजनयिक संबंध स्थापित हुए थे, जिसके बाद व्यापार और रक्षा सहयोग में तेजी आई। चिदंबरम के मुताबिक इस युद्ध का सबसे बड़ा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच चुकी हैं, इसका असर भारत समेत कई देशों में एलपीजी और ईंधन की कीमतों पर दिखाई दे रहा है। साथ ही वैश्विक शेयर बाजारों में गिरावट और महंगाई बढ़ने का खतरा भी गहरा गया है। उन्होंने कहा कि युद्ध हमेशा क्रूर और विनाशकारी होता है। मशहूर अमेरिकी सैन्य अधिकारी का हवाला देते हुए चिदंबरम ने कहा कि युद्ध अक्सर क्रूर, निरर्थक और मूर्खतापूर्ण होता है। चिदंबरम ने चेतावनी दी कि यदि संघर्ष लंबा चला तो इसके राजनीतिक, आर्थिक और मानवीय परिणाम और भी गंभीर हो सकते हैं। सिराज/ईएमएस 15मार्च26