नई दिल्ली (ईएमएस)। भारतीय वैज्ञानिकों ने एक ऐसी तकनीक विकसित की है, जिससे चावल का सेवन करने पर शुगर बढ़ने का खतरा कम हो सकता है और साथ ही इसमें अधिक पोषण भी मिल सकेगा। सीएसआईआर-एनआईआईएसटी, तिरुवनंतपुरम के वैज्ञानिकों ने चावल की संरचना में बदलाव कर एक नया ‘डिजाइनर चावल’ तैयार किया है। इस तकनीक में चावल के मूल घटकों जैसे स्टार्च, प्रोटीन और फाइबर को अलग-अलग कर उनकी मात्रा को नए तरीके से संतुलित किया गया। सामान्य चावल में स्टार्च की मात्रा अधिक होती है, जो ब्लड शुगर बढ़ाने का कारण बनती है। वैज्ञानिकों ने इस स्टार्च का बड़ा हिस्सा हटाकर उसकी जगह प्रोटीन और माइक्रोन्यूट्रिएंट्स को शामिल किया है। इस प्रक्रिया में किसी प्रकार का जीन परिवर्तन नहीं किया गया, बल्कि आधुनिक फूड-प्रोसेसिंग तकनीक का उपयोग किया गया है। संस्थान के निदेशक सी. अनांनधरामक्रष्णन के अनुसार यह प्रक्रिया किसी घर को दोबारा बनाने जैसी है, जिसमें पुराने ढांचे को अलग कर नई संरचना तैयार की जाती है। इस तकनीक के तहत टूटे हुए चावल को पीसकर उसका आटा बनाया गया और उसमें प्रोटीन के साथ आयरन, फोलिक एसिड और विटामिन B12 जैसे सूक्ष्म पोषक तत्व मिलाए गए। इसके बाद इस मिश्रण को दोबारा चावल के दानों का आकार दिया गया, जो दिखने, पकाने और स्वाद में सामान्य चावल की तरह ही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक यह डिजाइनर चावल केवल पेट भरने वाला भोजन नहीं बल्कि शरीर को स्वस्थ रखने में भी मददगार हो सकता है। इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स 55 से कम बताया गया है, जिससे शरीर में ऊर्जा धीरे-धीरे रिलीज होती है और ब्लड शुगर अचानक नहीं बढ़ता। यही कारण है कि यह डायबिटीज मरीजों के लिए विशेष रूप से उपयोगी माना जा रहा है। इसके अलावा इस चावल में सामान्य चावल की तुलना में कहीं अधिक प्रोटीन मौजूद है। जहां साधारण चावल में करीब 6 से 8 प्रतिशत प्रोटीन पाया जाता है, वहीं इस नए संस्करण में 20 प्रतिशत से अधिक प्रोटीन शामिल किया गया है। साथ ही इसमें आयरन, फोलिक एसिड और विटामिन बी12 जैसे पोषक तत्व भी जोड़े गए हैं, जो एनीमिया जैसी समस्याओं से निपटने में मदद कर सकते हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस तकनीक की सबसे खास बात यह है कि लोगों को अपनी खान-पान की आदतों में बड़ा बदलाव करने की जरूरत नहीं होगी। वे वही चावल खा सकेंगे, लेकिन उसमें पहले से कहीं अधिक पोषण मिलेगा, जिससे डायबिटीज और कुपोषण जैसी दो बड़ी समस्याओं से एक साथ निपटने में मदद मिल सकती है। बता दें कि भारत में डायबिटीज के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है और देश को अक्सर डायबिटीज की वैश्विक राजधानी भी कहा जाता है। एक अनुमान है कि देश में 10 करोड़ से अधिक लोग इस बीमारी से प्रभावित हैं, जबकि बड़ी संख्या ऐसे लोगों की भी है जिन्हें यह बीमारी होने के बावजूद इसकी जानकारी नहीं होती। विशेषज्ञों का मानना है कि सही खान-पान के जरिए डायबिटीज को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। आमतौर पर मरीजों को चावल और आलू जैसे खाद्य पदार्थों से परहेज करने की सलाह दी जाती है, लेकिन भारत में चावल दैनिक भोजन का अहम हिस्सा है। सुदामा/ईएमएस 17 मार्च 2026