अंतर्राष्ट्रीय
18-Mar-2026
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तेहरान (ईएमएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान से पंगा लेकर खुद के पैर में कुल्हाड़ी मार ली है। इस जंग में अमेरिकी बुरी तरह फंस गया है। ट्रंप की देश दुनिया में निंदा हो रही है। अब उनसे हालात ये हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति और ईरान के शीर्ष नेतृत्व की ओर से विरोधाभासी दावे सामने आ रहे हैं। एक ओर राष्ट्रपति ट्रंप सार्वजनिक मंचों पर यह कह रहे हैं कि ईरान की सैन्य ताकत लगभग ध्वस्त हो चुकी है और तेहरान के नेता बातचीत के लिए बेताब हैं, वहीं जमीनी हकीकत और अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स कुछ और ही इशारा कर रही हैं। ट्रंप का दावा है कि ईरान के लोग और वहां का नेतृत्व वार्ता की मेज पर आने के लिए गुहार लगा रहे हैं, लेकिन पर्दे के पीछे की खबरें बताती हैं कि तेहरान ने अमेरिका के साथ सीधे संवाद के रास्ते फिलहाल पूरी तरह बंद कर रखे हैं। सैन्य मोर्चे पर ट्रंप और अमेरिकी रक्षा मंत्रालय का दावा है कि उन्होंने ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमता को 90 से 95 प्रतिशत तक खत्म कर दिया है। इसके विपरीत, इजरायल और अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ईरान के हमले अब भी जारी हैं। इस युद्ध का सबसे गंभीर असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ा है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान की रणनीतिक बढ़त ने तेल और गैस की कीमतों में भारी उछाल ला दिया है। अमेरिका द्वारा अंतरराष्ट्रीय सैन्य गठबंधन बनाने की कोशिशों को भी झटका लगा है, क्योंकि जर्मनी जैसे कई यूरोपीय देशों ने इस युद्ध को नाटो का हिस्सा मानने से इनकार कर दिया है। अमेरिका बोला- बात कर लो, ईरान ने कहा अभी नहीं रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप के बेहद करीबी और अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने पिछले सप्ताह ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को बातचीत की संभावनाओं पर चर्चा के लिए संदेश भेजे थे। हालांकि, ईरान की ओर से इन संदेशों का कोई जवाब नहीं दिया गया। ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई के फैसले के कारण इन संदेशों को नजरअंदाज किया गया है। ईरानी नेतृत्व का मानना है कि फिलहाल अमेरिका से किसी भी तरह की सीधी बातचीत अभी मुमकिन नहीं है और युद्धविराम का अंतिम फैसला पूरी तरह से सर्वोच्च नेता के विवेक पर निर्भर है। ईरान ने कहा- हमने कभी युद्धविराम की पहल नहीं की इस बीच, बयानों की इस जंग में अमेरिकी अधिकारियों ने एक अलग कहानी पेश की है। उनका दावा है कि वास्तव में ईरानी विदेश मंत्री अरागची ने ही बातचीत की पहल की थी। हालांकि, अरागची ने इन दावों को सोशल मीडिया पर सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने अमेरिका पर गलत जानकारी फैलाकर तेल बाजार और वैश्विक जनता को भ्रमित करने का आरोप लगाया। अरागची ने दो टूक शब्दों में कहा कि ईरान ने न तो युद्धविराम की मांग की है और न ही बातचीत की पहल की है; वह अपनी रक्षा के लिए तब तक लड़ता रहेगा जब तक जरूरत महसूस होगी। ईरानी अधिकारियों का आरोप है कि अमेरिका अब इस युद्ध से निकलने का सुरक्षित रास्ता तलाश रहा है। वीरेंद्र/ईएमएस 18 मार्च 2026