राष्ट्रीय
18-Mar-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। घंटों तक कुर्सी पर एक ही पोस्चर में बैठे रहने और अनियमित दिनचर्या के कारण पीठ, कमर, कंधों और पैरों में जकड़न व दर्द की समस्या तेजी से बढ़ रही है। हैल्थ एक्सपर्ट के अनुसार, नियमित रूप से छोटी-छोटी एक्सरसाइज करने से शरीर में लचीलापन बढ़ता है और रक्त संचार बेहतर होता है। ऐसी ही एक आसान और प्रभावी एक्सरसाइज टखनों की मूवमेंट यानी एंकल मूवमेंट है, जिसे मिनिस्ट्री ऑफ आयुष द्वारा भी सुझाया गया है। इस सरल अभ्यास को मात्र तीन से पांच मिनट में किया जा सकता है और इसे घर या ऑफिस में बैठकर भी आसानी से किया जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार टखनों की हल्की गतिविधियां पैरों में रक्त प्रवाह को बढ़ाने में मदद करती हैं और जोड़ों की अकड़न को कम करती हैं। लंबे समय तक बैठे या खड़े रहने वाले लोगों के लिए यह एक्सरसाइज विशेष रूप से फायदेमंद मानी जाती है। नियमित रूप से एंकल मूवमेंट करने से टखनों की लचीलापन बढ़ती है और पैरों के जोड़ों की कार्यक्षमता बेहतर होती है। इससे पूरे शरीर का संतुलन भी सुधरता है और चलने-फिरने में आसानी होती है। इस व्यायाम को करना बेहद सरल है। इसके लिए सबसे पहले दोनों पैरों को साथ रखकर सीधे खड़े हो जाएं और शरीर को संतुलित रखें। हाथों को कमर पर या शरीर के दोनों ओर रखा जा सकता है। इसके बाद दाएं पैर को थोड़ा आगे की ओर उठाएं और जमीन से लगभग नौ इंच ऊपर रखें। फिर पैर को धीरे-धीरे ऊपर और नीचे की दिशा में हिलाएं, जिसे पॉइंट और फ्लेक्स मूवमेंट कहा जाता है। इसके बाद पैर को दाएं और बाएं दिशा में घुमाएं और फिर गोल-गोल घुमाने की प्रक्रिया करें। यह मूवमेंट पहले क्लॉकवाइज और फिर एंटी-क्लॉकवाइज दिशा में पांच से दस बार दोहराई जा सकती है। अभ्यास करते समय गति को धीमी और नियंत्रित रखना जरूरी है ताकि टखनों पर अनावश्यक दबाव न पड़े। यह पूरा अभ्यास कुछ ही मिनटों में पूरा हो जाता है और इसे सुबह उठने के बाद या दिन में किसी भी समय किया जा सकता है। अगर शुरुआत में संतुलन बनाए रखने में कठिनाई हो तो दीवार या कुर्सी का सहारा लिया जा सकता है। नियमित अभ्यास से टखनों और पैरों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं और रक्त संचार बेहतर होने से पैरों की थकान तथा सूजन भी कम हो सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार इस प्रकार के सरल व्यायाम शरीर की समग्र कार्यक्षमता को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। टखनों की लचीलापन बढ़ने से घुटनों और कूल्हों पर दबाव कम पड़ता है, जिससे चलने-फिरने में आराम मिलता है। सुदामा/ईएमएस 18 मार्च 2026