राष्ट्रीय
18-Mar-2026
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नई दिल्ली,(ईएमएस)।पश्चिम-एशिया क्षेत्र में ईरान और अमेरिका के बीच जारी भीषण युद्ध के दौर में भारत में चाबहार बंदरगाह के मुद्दे की गूंज सुनाई दी है। जिसका जिक्र इस बार सरकार की तरफ से नहीं बल्कि विदेश मंत्रालय की संसदीय स्थायी समिति द्वारा मंगलवार को संसद में पेश की गई एक रिपोर्ट में किया गया है। जिसमें ये कहा गया है कि हालिया घटनाक्रम की वजह से बंदरगाह विकास की परियोजना खतरे में है। देश के लिए चाबहार रणनीतिक रूप से एक बेहद महत्वपूर्ण बंदरगाह है। उक्त संघर्ष, अमेरिका की ओर से बीते वक्त में इसके निर्माण कार्य पर लगाई गई पाबंदी और टैरिफ जैसे कुछ निर्णयों का इस पर खासा असर देखने को मिला है। वहीं, समिति ने मामले के प्रभावों को लेकर सरकार द्वारा सभी भागीदार पक्षों से संवाद के क्रम को लगातार बनाए रखने के कदम का स्वागत किया है। यहां बता दें कि मंत्रालय की वर्ष 2026-27 की अनुदान मांगों पर समिति की यह 12वीं रिपोर्ट थी। जिसे 17 मार्च को संसद में पेश किया गया था। समिति की अध्यक्षता कांग्रेस की पूर्ववर्ती सरकार में विदेश राज्य मंत्री और मौजूदा वरिष्ठ सांसद शशि थरूर कर रहे हैं। समिति ने रिपोर्ट में ये भी कहा कि चाबहार बंदरगाह भारत के लिए रणनीतिक दृष्टिकोण से एक महत्वपूर्ण बंदरगाह है। जिससे उसे अफगानिस्तान और मध्य- एशिया में सीधे प्रवेश करने का अवसर मिलेगा। साथ ही यह बंदरगाह अंतरराष्ट्रीय नार्थ साउथ कॉरिडोर के साथ जुड़ने के लिए भी काफी अहम भूमिका निभाता है। इस संबंध में तमाम योजनाओं और प्रगति को लेकर समिति ने मंत्रालय से उसे लगातार जरूरी जानकारी साझा करने के लिए कहा है। इसके अलावा पिछले साल सितंबर महीने में अमेरिका द्वारा 2018 में लगाई गई पाबंदियों को वापस लेने के एक निर्णय का भी उल्लेख किया है। बंदरगाह को नहीं दी कोई धनराशि समिति ने अपनी रिपोर्ट में यह कहा कि वर्ष 2025-26 के बजट अनुमान में चाबहार बंदरगाह के विकास के लिए विदेश मंत्रालय ने 100 करोड़ रुपए की धनराशि आवंटित की थी। जिसे संशोधित बजट अनुमान में बढ़ाकर 400 करोड़ रुपए तक कर दिया गया था। आवंटित की गई ये धनराशि मौजूदा वर्ष 2026 के शुरुआती जनवरी महीने में पूरी तरह से प्रयोग कर ली गई है। वहीं, मंत्रालय ने समिति को बताया है कि वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में चाबहार परियोजना के विकास के लिए कोई बजट नहीं दिया गया है। क्योंकि भारत ने अपनी 120 मिलियन डॉलर की प्रतिबद्धता को पहले ही पूरा कर लिया है। जिसमें बंदरगाह के लिए उपकरणों की खरीद शामिल है। जो दोनों पक्षों के बीच 2024 में हस्ताक्षरित समझौते का हिस्सा है। वीरेंद्र/ईएमएस/18मार्च2026